संदिली सिंह,रायपुर,26अगस्त2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
🟠गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और सबसे उल्लासपूर्ण पर्व हैं। यह दिन विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता हैं। मान्यता हैं,कि गणपति बप्पा घर-घर आकर भक्तों की कठिनाइयों को दूर कर उन्हें सुख-समृद्धि और नई ऊर्जा का आशीर्वाद देते हैं।
🟠इतिहास और परंपरा
गणेश चतुर्थी का पर्व मराठा साम्राज्य के दौर से ही भव्य रूप में मनाया जाता रहा हैं। स्वतंत्रता संग्राम के समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे सार्वजनिक उत्सव के रूप में प्रचलित किया, जिससे समाज में एकता और जागरूकता फैली। आज यह त्योहार न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता हैं।
🟠पूजा विधि और विशेषता
🔸️प्रतिमा स्थापना: भक्त घरों व पंडालों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं।
🔸️व्रत और पूजा: 10 दिनों तक विशेष पूजा, आरती और व्रत रखा जाता हैं।
🔸️मोदक का महत्व: भगवान गणेश को मोदक प्रिय हैं, इसलिए इस अवसर पर मोदक और अन्य मिठाइयाँ प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं।
🔸️गणेश विसर्जन: अंतिम दिन “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों के साथ गणेश प्रतिमा का जल में विसर्जन किया जाता हैं, जो नई शुरुआत और जीवन के चक्र का प्रतीक हैं।
🟠पर्यावरणीय पहलू
आज के समय में गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं। मिट्टी की मूर्तियों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने से जल स्रोत प्रदूषित होने से बचाए जा सकते हैं। कई शहरों में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा हैं, जो समाज को प्रकृति के साथ संतुलन बनाना सिखाता हैं।
🟠गणेश चतुर्थी 2025 की झलकियाँ
इस साल देशभर में भव्य पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्तिमय आयोजनों की गूँज सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया पर भी “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष ट्रेंड में हैं। मंदिरों और घरों में रौनक देखते ही बनती हैं।
🟠गणपति बप्पा से प्रार्थना
इस गणेश चतुर्थी पर हम सब यही कामना करें,कि विघ्नहर्ता गणपति बप्पा हमारे जीवन से कठिनाइयाँ दूर करें और हमें नई राह दिखाएँ।
🟠निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि एकता, विश्वास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला उत्सव हैं। गणपति बप्पा के आशीर्वाद से समाज में भाईचारे और सकारात्मकता का संचार होता हैं।
“गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!”












