संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,19नवंबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में देशभर में,एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 समारोह में राज्य के 12 जिलों को सम्मानित किया।
🟠छत्तीसगढ़ के 12 जिलों ने रचा इतिहास
सम्मानित जिले: रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राज्य के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा,कि यह उपलब्धि “प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने में मील का पत्थर साबित होगी।”
🟠जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ का मॉडल देशभर में चर्चित
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में जल संचयन सामुदायिक भागीदारी संरचनात्मक विकास में, छत्तीसगढ़ ने नए आयाम स्थापित किए हैं। सरकार के अभिनव प्रयासों और जनता की सक्रिय भागीदारी के कारण राज्य में जल संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिला हैं।
🟠जिलों के प्रमुख उपलब्धियां
🟠रायपुर
🔸️जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य
🔸️देश के नगर निगमों में प्रथम स्थान
🔸️33,082 कार्य (नगर निगम) + 36,282 कार्य (जिला प्रशासन)
🟠राजनांदगांव
🔸️ईस्ट जोन में प्रथम स्थान
🔸️जनभागीदारी कैटेगरी में दूसरा स्थान
🔸️58,967 कार्य + ₹2 करोड़ प्रोत्साहन राशि
🟠बालोद
🔸️कैटेगरी 01 में पहला स्थान
🔸️92,742 नई जल संरचनाएँ
🔸️₹2 करोड़ प्रोत्साहन राशि
🟠महासमुंद
🔸️कैटेगरी 2 में प्रथम स्थान
🔸️35,182 जल संरचनाओं का निर्माण
🟠बलौदाबाजार-भाटापारा
🔸️कैटेगरी 2 में दूसरा स्थान
🔸️30,927 संरचनाएँ
🔸️₹1 करोड़ प्रोत्साहन
🟠गरियाबंद
🔸️कैटेगरी 2 में तीसरा स्थान
🔸️26,025 सतही जल संरक्षण कार्य
🔸️₹1 करोड़ प्रोत्साहन
🟠बिलासपुर
🔸️कैटेगरी 03 में प्रथम स्थान
🔸️21,058 संरचनाएँ
🔸️₹25 लाख पुरस्कार
🟠रायगढ़
🔸️कैटेगरी 03 में द्वितीय स्थान
🔸️19,088 जल परियोजनाएँ
🔸️₹25 लाख पुरस्कार
🟠धमतरी
🔸️आठवां स्थान | 7,674 परियोजनाएँ | ₹25 लाख
🟠बलरामपुर
🔸️छठा स्थान | 8,644 परियोजनाएँ | ₹25 लाख
🟠दुर्ग
🔸️16वाँ स्थान | 5,010 परियोजनाएँ | ₹25 लाख
🟠सूरजपुर
🔸️12वाँ स्थान | 5,797 परियोजनाएँ | ₹25 लाख
🟠मुख्यमंत्री का बयान
“यह सम्मान छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक, पंचायत, प्रशासन एवं जल संरचनाओं से जुड़े सभी लोगों का हैं। सामुदायिक जागरूकता और जनभागीदारी ने जल संरक्षण के प्रयास को जन आंदोलन बना दिया हैं।”












