संदिली सिंह,बस्तर,छत्तीसगढ़,5जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
बस्तर की धरती से एक बार फिर प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई हैं। आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष कर तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की दो होनहार बेटियों रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बस्तर अंचल का नाम रोशन किया हैं।इन बेटियों की उपलब्धि यह साबित करती हैं,कि यदि हौसले बुलंद हों तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
🟠संघर्षों के बीच हासिल की बड़ी सफलता
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय करपावंड से अध्ययन कर शानदार सफलता प्राप्त की, जबकि डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार में पढ़ाई करते हुए उत्कृष्ट अंक हासिल किए।दोनों छात्राओं ने मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर यह उपलब्धि हासिल कर ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल पेश की हैं।
🟠 शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिला संबल
तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दोनों छात्राओं को सम्मानित करते हुए प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए दोनों छात्राओं को स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए।
🟠बेटियों के सपनों को मिले नए पंख
रुद्राणी कश्यप की माता कुंती कश्यप ने बताया,कि उनकी बेटी की विशेष रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) विषय में हैं,और परिवार उसकी उच्च शिक्षा के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।वहीं डालेश्वरी बघेल के पिता लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का श्रेय बेटी की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।
🟠ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
तेंदूपत्ता संग्रहण जैसे श्रमसाध्य कार्यों से जीवनयापन करने वाले परिवारों की इन बेटियों की सफलता आज हजारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। शिक्षा प्रोत्साहन योजना ने न केवल उनकी आर्थिक सहायता की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान की है।यह उपलब्धि बताती हैं,कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।












