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डेढ़ लाख रुपये के केंदुपत्ता के साथ दो गिरफ्तार, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

संदिली सिंह,झारसुगुड़ा,5जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

अवैध केंदुपत्ता कारोबार के खिलाफ झारसुगुड़ा जिले के,बेलपहाड़ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य का केंदुपत्ता जब्त किया हैं। कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने एक ऑटो रिक्शा को भी जब्त किया तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया। इस कार्रवाई से अवैध वन उपज तस्करी से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया हैं।

🟠गुप्त सूचना पर वन विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई

वन विभाग को सूचना मिली थी,कि बड़ी मात्रा में केंदुपत्ता एक ऑटो के जरिए झारसुगुड़ा से बेलपहाड़ लाया जा रहा हैं। सूचना मिलते ही बेलपहाड़ रेंजर प्रदीप नायक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई।वन अमले ने संदिग्ध वाहन का पीछा कर बेलपहाड़ स्थित दुर्गा मंदिर के पास उसे रोक लिया। तलाशी के दौरान ऑटो क्रमांक OD-23-S-4208 से 2 क्विंटल 87 किलोग्राम केंदुपत्ता बरामद किया गया।

🟠डेढ़ लाख की वन उपज जब्त

वन विभाग के अनुसार जब्त केंदुपत्ता की अनुमानित कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये आंकी गई हैं। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि केंदुपत्ता राजपुर क्षेत्र से लाया गया था और इसे आगे पश्चिम बंगाल के खड़गपुर भेजने की तैयारी थी।

🟠दो आरोपी गिरफ्तार, ऑटो जब्त मामले में वन विभाग ने –

🔸️सैदुल बीबी (39), निवासी पश्चिम बंगाल

🔸️जावेद खान (34), निवासी तलीभाटा, झारसुगुड़ा से  गिरफ्तार किया हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।

🟠बड़े नेटवर्क की तलाश में वन विभाग

वन अधिकारियों का कहना हैं,कि केंदुपत्ता के संग्रहण और परिवहन के लिए वैध अनुमति एवं दस्तावेज अनिवार्य हैं। बिना अनुमति वन उपज का परिवहन कानूनन अपराध हैं।अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं,कि क्या इस अवैध कारोबार के पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क सक्रिय हैं। विभाग यह पता लगाने में जुटा हैं,कि वन क्षेत्रों से इतनी बड़ी मात्रा में केंदुपत्ता बाहर कैसे पहुंच रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

🟠केवल वाहक नहीं, सरगनाओं तक पहुंचना चुनौती

विशेषज्ञों का मानना हैं,कि अवैध केंदुपत्ता तस्करी पर स्थायी रोक लगाने के लिए केवल वाहकों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं हैं। इसके पीछे सक्रिय बड़े दलालों और संगठित नेटवर्क तक कार्रवाई पहुंचना जरूरी हैं।वन विभाग की यह कार्रवाई अवैध वन उपज तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं, जिससे भविष्य में ऐसे कारोबारियों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद हैं।

 

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