Nexis News

वन विभाग की लापरवाही से गई कोटरा की जान, पूर्व डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं बच सका संरक्षित वन्यजीव

संदिली सिंह,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,6जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

सरगुजा वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। जंगल से भटककर गांव पहुंचा एक घायल कोटरा (बार्किंग डियर) आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। आरोप हैं,कि समय पर उचित इलाज और देखभाल नहीं मिलने के कारण संरक्षित वन्यजीव की मौत हो गई।जानकारी के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पूर्व अंबिकापुर से लगे ग्राम खैरबार में जंगल से भटककर पहुंचे कोटरा पर आवारा कुत्तों ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए,घायल वन्यजीव को बचाया और उपचार के लिए वन विभाग को सौंपने की कोशिश की।

ग्रामीणों का आरोप हैं,कि शुरुआती दौर में वन विभाग ने घायल कोटरा को अपने कब्जे में लेने से ही इंकार कर दिया था। मामला सामने आने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के हस्तक्षेप पर वन विभाग ने कोटरा को अपने संरक्षण में लिया और बेहतर इलाज कराने का आश्वासन दिया था।हालांकि, कुछ ही दिनों बाद चेंद्रा स्थित वन विभाग की नर्सरी में इलाज के दौरान कोटरा की मौत हो गई। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग की तैयारियों और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि यदि समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो शायद इस बेजुबान वन्यजीव की जान बचाई जा सकती थी। वहीं वन विभाग का कहना हैं,कि घायल कोटरा का उपचार किया जा रहा था, लेकिन उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।अब इस पूरे मामले को लेकर जिम्मेदारी तय करने और वन्यजीवों के उपचार तंत्र को मजबूत करने की मांग उठने लगी हैं।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें

error: Content is protected !!