संदिली सिंह,सुकमा,छत्तीसगढ़,6जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से बदलाव और उम्मीद की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई हैं। कभी जंगलों में हथियार थामने वाले युवा अब निर्माण कार्यों का प्रशिक्षण लेकर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रहे पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का नया अवसर मिल रहा हैं।जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयास से 25 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं, जिनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, चिनाई, प्लास्टर और भवन निर्माण की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
🟠अब बनाएंगे गरीबों के सपनों का घर
प्रशिक्षित युवा आने वाले समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भागीदारी निभाएंगे। जिन हाथों में कभी बंदूक थी, वही हाथ अब गरीब परिवारों के लिए आशियाना तैयार करेंगे।
🟠सोड़ी हूंगी: “अब जिंदगी में डर नहीं, सपने हैं”
कोंटा क्षेत्र की रहने वाली सोड़ी हूंगी बताती हैं कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें सुरक्षा, सम्मान और रोजगार का अवसर मिला। अब वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती हैं।
🟠पदम रैनू: “सरकार ने हमें भटकने से बचाया”
जगरगुंडा निवासी पदम रैनू कहते हैं,कि जंगलों की अनिश्चित जिंदगी छोड़कर अब उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार की राह मिली हैं। उनके मुताबिक यह पहल उनके जैसे सैकड़ों युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई हैं।
🟠280 से ज्यादा युवाओं को मिला नया जीवन
कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका हैं। प्रशासन का उद्देश्य उन्हें स्थायी रोजगार और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना हैं।यह पहल न केवल युवाओं के पुनर्वास की मिसाल बन रही हैं, बल्कि जिले के विकास कार्यों को भी नई गति दे रही हैं। बदलते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता ही स्थायी शांति की सबसे मजबूत नींव हैं।












