न्यूज डेस्क,राउरकेला,उड़ीसा,1जुलाई 2026
राउरकेला के निकट स्थित तुमकेला गांव में प्रस्तावित, ऑयल इंडिया लिमिटेड के बायो-प्लांट का निर्माण कार्य बुधवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के विरोध के बावजूद प्रशासन ने परियोजना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर तीन प्लाटून पुलिस बल की तैनाती की गई थी। निर्माण कार्य के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई, लेकिन पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
🟠ग्रामीणों का आरोप जनसुनवाई से पहले क्यों शुरू हुआ निर्माण?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना हैं,कि परियोजना को लेकर अब तक उनकी आशंकाओं का समाधान नहीं किया गया हैं। उनका आरोप हैं,कि व्यापक जनसुनवाई और स्थानीय लोगों से संवाद किए बिना निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता के खिलाफ हैं।विरोध कर रहे लोगों का कहना हैं,कि यदि परियोजना वास्तव में जनहित में हैं, तो पहले इसके पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और कृषि पर पड़ने वाले असर की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
🟠प्रदूषण और खेती पर असर की चिंता
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना हैं,कि बायो-प्लांट शुरू होने के बाद क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण बढ़ सकता हैं। इसके अलावा आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि और भूजल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही हैं। लोगों का कहना हैं,कि परियोजना के कारण भविष्य में स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता हैं।
🟠क्या हैं,पूरी परियोजना?
यह बायो-प्लांट राउरकेला महानगर निगम (RMC) और राउरकेला स्टील प्लांट (RSP) क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले ठोस नगर अपशिष्ट (Municipal Solid Waste) के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए प्रस्तावित हैं।योजना के तहत आधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी तकनीक के जरिए कचरे को गैस अथवा ऊर्जा में परिवर्तित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए राउरकेला महानगर निगम, राउरकेला स्टील प्लांट और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया हैं। समझौते के अनुसार आरएसपी ने करीब 10 एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए उपलब्ध कराई हैं।
🟠विरोध जारी, परियोजना रोकने की मांग
ग्रामीणों और आंदोलनकारी संगठनों ने मांग की हैं,कि जब तक जनसुनवाई पूरी नहीं हो जाती और स्थानीय लोगों की आपत्तियों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए। उनका कहना हैं, कि यदि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाना चाहती हैं, तो पहले स्थानीय समुदाय का विश्वास जीतना जरूरी हैं।कुछ ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई,कि यदि परियोजना से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरे की संभावना हैं,तो इसे किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थापित किया जाए।
🟠विकास बनाम पर्यावरण की बहस तेज
तुमकेला का यह विवाद अब केवल एक औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं रह गया हैं। यह मामला विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय के अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस बनता जा रहा हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन, कंपनी और ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत इस परियोजना की दिशा तय कर सकती हैं।












