न्यूज डेस्क,छाल,छत्तीसगढ़,3जुलाई 2026
प्रस्तावित दुर्गापुर कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा हैं। भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास, वनाधिकार और सर्वे प्रक्रिया को, लेकर प्रभावित गांवों के प्रतिनिधिमंडल ने पहले रायगढ़ स्थित SECL के महाप्रबंधक (GM) और बाद में कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। करीब दो घंटे चली बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी भी प्रमुख विषय पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
🟠ग्रामीणों ने उठाए मुआवजा और पुनर्वास के सवाल
करीब 50 ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा,कि जब तक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास नीति, ग्रामसभा की सहमति, वनाधिकार और आजीविका सुरक्षा को लेकर लिखित जानकारी नहीं दी जाती, तब तक परियोजना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि समान गुणवत्ता वाले कोयले के बावजूद अलग-अलग गांवों की कृषि भूमि के मुआवजे में भारी अंतर क्यों रखा गया हैं।
🟠ड्रोन सर्वे पर बनी असमंजस की स्थिति
बैठक में ड्रोन सर्वे में हो रही देरी भी प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में पुराने रिकॉर्ड या उपग्रह चित्रों के आधार पर सर्वे किया गया तो हाल के वर्षों में बने मकान और अन्य निर्माण मुआवजे से बाहर रह सकते हैं। हालांकि प्रशासन या SECL की ओर से GPS आधारित सर्वे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई हैं।
🟠SECL जीएम ने कई सवालों पर दिया जवाब
बैठक में SECL महाप्रबंधक ने कहा,कि सभी गांवों के लिए समान मुआवजा तय करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। उन्होंने बताया,कि वर्ष 2016 से पहले वनाधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों को नियमानुसार मुआवजा मिलेगा। वहीं, बेजाकब्जाधारियों को केवल मकान का मुआवजा दिए जाने की बात कही गई। शाहपुर और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी जांच के बाद निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया।
🟠कलेक्टर से मुलाकात के बाद बढ़ी उम्मीदें
ग्रामीणों के अनुसार, रायगढ़ कलेक्टर से हुई चर्चा में यह कहा गया,कि जब तक SECL प्रभावित परिवारों को मुआवजे और पुनर्वास की स्पष्ट लिखित जानकारी नहीं देता, तब तक ड्रोन सर्वे नहीं कराया जाएगा। हालांकि इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया हैं।
🟠परियोजना के भविष्य पर टिकी निगाहें
जानकारों का मानना हैं,कि दुर्गापुर कोल ब्लॉक परियोजना पहले ही वर्षों की देरी झेल चुकी हैं। ऐसे में यदि सर्वे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी खिंचती हैं,तो परियोजना की समयसीमा और प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रभावित ग्रामीणों का कहना हैं, कि सभी विवादित मुद्दों का समाधान होने के बाद ही परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।












