न्यूज डेस्क,रायगढ़,छत्तीसगढ़,10जुलाई 2026
रायगढ़ जिले के संवेदनशील छाल वन परिक्षेत्र में एक, बार फिर हाथी-मानव संघर्ष को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं। देउरमार–बोजिया मुख्य मार्ग पर हाथियों का झुंड घंटों तक डटा रहा, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना रहा। आरोप हैं,कि पूरे घटनाक्रम के दौरान वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची और न ही सड़क को बंद करने या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की गई।स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि हाथियों की मौजूदगी के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर रहे। घटना के बाद विभाग द्वारा ग्रामीणों को नियम-कानून का हवाला देकर कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई हैं।
🟠करोड़ों का अर्ली वार्निंग सिस्टम, फिर भी समय पर नहीं मिली सूचना
ग्रामीणों ने सवाल उठाया,कि हाथियों की निगरानी और समय पर सूचना देने के लिए लगाए गए अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा गजराज टीम आखिर इस दौरान कहां थी। उनका कहना हैं,कि हाथी आबादी और मुख्य सड़क तक पहुंच गए, लेकिन विभाग को समय रहते इसकी जानकारी तक नहीं हुई।
🟠सड़क बंद क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों के मुताबिक, जब हाथियों का झुंड मुख्य मार्ग पर मौजूद था, तब वन विभाग को तत्काल बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद करना चाहिए था या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए थी। ऐसा नहीं होने से लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
🟠ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का कहना हैं,कि जब हाथियों से सुरक्षा देने की जिम्मेदारी निभाने में विभाग विफल रहता हैं, तब घटना के बाद लोगों को ही दोषी ठहराने और कार्रवाई की धमकी देने लगता हैं।ग्रामीणों ने मांग की हैं,कि वन विभाग हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करे, समय पर अलर्ट जारी करे और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।












