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गांव की सड़क पर कोयला डिपो का संकट : भारी ट्रकों से बढ़ा हादसों का खतरा, अंकीरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

न्यूज डेस्क,जशपुर,छत्तीसगढ़,18जुलाई 2026

ग्राम पंचायत अंकीरा में मुख्य ग्रामीण मार्ग के किनारे, संचालित कोयला डिपो अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा हैं। संकरी सड़क पर दिन-रात कोयले से लदे भारी ट्रकों और ट्रेलरों की लगातार, आवाजाही से न केवल आवागमन बाधित हो रहा हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ गया हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की हैं।🟠 स्कूली बच्चों और यात्रियों की बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के अनुसार यही सड़क गांव का मुख्य संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन स्कूली बच्चे,महिलाएं,बुजुर्ग, किसान,बसें और दोपहिया-चारपहिया वाहन गुजरते हैं। भारी ट्रकों की वजह से कई बार बस और ट्रक आमने-सामने फंस जाते हैं,जिससे लंबा जाम लग जाता हैं, और बाइक सवारों व पैदल राहगीरों की जान जोखिम में पड़ जाती हैं।

🟠बरसात में सड़क बनी दलदल, गड्ढों से बढ़ा खतरा

लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं,और बारिश में इनमें पानी भर जाने से हादसों की आशंका और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना हैं,कि कई लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं,जबकि बच्चों को रोज इसी रास्ते से स्कूल जाना पड़ता हैं।🟠धूल और कीचड़ से जनजीवन प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया,कि गर्मी में कोयले की धूल घरों, दुकानों और खेतों तक पहुंच रही हैं,जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ रहा हैं। वहीं बारिश के दौरान सड़क कीचड़ में बदल जाती हैं,जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता हैं।

🟠आबादी के बीच डिपो पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना हैं,कि आबादी के बीच और संकरी सड़क के किनारे कोयला डिपो का संचालन सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं हैं। उनका कहना हैं,कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता हैं,तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने मांग की,कि ऐसे औद्योगिक कार्य आबादी से दूर और चौड़ी सड़क वाले क्षेत्रों में संचालित किए जाएं।

🟠प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग से सड़क का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत, भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने तथा कोयला डिपो के संचालन की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की हैं। ग्रामीणों का कहना हैं,कि वे विकास और उद्योग के विरोधी नहीं हैं,लेकिन लोगों की सुरक्षा और सुविधा से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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