न्यूज डेस्क,स्पेशल रिपोर्ट,रामानुजगंज/छत्तीसगढ़।23 सितंबर2025 — Nexis News
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित पहाड़ी माई मंदिर अपनी खूबसूरती और विशेषताओं के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के बावजूद यहां बारहों महीनें श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं। यहां दर्शन करने आने वालों में झारखंड,बिहार,उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के भी श्रद्धालु शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ के एकदम उत्तर में कनहर नदी के तट पर बसा रामानुजगंज छत्तीसगढ़ का अंतिम शहर हैं। कनहर नदी उत्तर सरगुजा की सबसे बड़ी नदी हैं। इसके तट पर बसा यह शहर मिली जुली दो प्रांतो की संस्कृति को बड़ी खूबसूरती से अपने अंदर आत्मसात किए हुए हैं। यहां के लोग सहस सरल और मिलनसार हैं। नदी के दूसरे तट पर झारखंड प्रांत का पहला कस्बा गोदमाना बसा हुआ हैं। दोनों प्रांतों के लोगों का यहां आना-जाना लगा रहता हैं।इसी प्रकार वहां के लोगों का भी पर्व-त्यौहार में पहाड़ी माई मंदिर में दर्शनार्थ आना-जाना लगा रहता हैं।
मालकेतु पर्वत पर स्थित पहाड़ी माई मंदिर पहुंच कर लोगों को बहुत सुकून महसूस होता हैं। यहां की हरियाली, सात पहाड़ों से घिरा मंदिर लोगों को आकर्षित करता हैं। नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक यहां विशेष आयोजन होते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के कारण बारह महीने यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता हैं। यहां से पूरा शहर, कन्हर नदी का बहता पानी, आसपास के प्राकृतिक दृश्य लोगों का मन मोह लेता हैं। मंदिर के परिसर को पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने अथक प्रयास किया हैं।
वार्ड क्रमांक 13 के रिंगरोड के पास पहाड़ी माई मंदिर स्थित है। बाईपास रोड से सीधे मंदिर के लिए रास्ता हैं। पहाड़ के नीचे पार्क जलाशय हैं। यहां आए लोग जलाशय में नौका बिहार का आनंद भी उठाते हैं। यहां से मंदिर जाने के लिए पहाड़ की चढ़ाई पार करनी होती हैं। मंदिर जाने वाला रास्ता पहाड़ प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ हैं। नीचे से ऊपर देखने पर पहाड़ का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता हैं। स्थानीय लोग सुबह-शाम मंदिर पहुंच जाते हैं, और पूजा-अर्चना कर यहां की प्रकृति में शांति महसूस करते हैं। इसके साथ ही सावन में लोग कन्हर नदी से जल भरकर पहाड़ी माई मंदिर परिसर में स्थित भगवान शिव की प्रतिमा पर जलाभिषेक करते हैं।
🟠सात पहाड़ियों से घिरा हैं मंदिर
पहाड़ी माई मंदिर सात पहाड़ियों से घिरा हुआ हैं। चारों ओर ऊंचे-नीचे पहाड़ एवं सिर्फ हरियाली दिखाई पड़ती हैं। पहाड़ के नीचे रामानुजगंज जलाशय का बड़ा बांध तथा सुंदर वनवाटिका हैं। यहां से आस-पास के गांव एवं कन्हर नदी का बहता पानी देखते ही बनता हैं। मंदिर में दर्शन कर वापस आने के दौरान लोग वनवाटिका जलाशय का मजा लेते हैं। जलाशय में लोग नौका बिहार भी करते हैं।
🟠तीर्थ स्थल के रूप में मिली पहचान
जिले में पहाड़ी माई मंदिर को तीर्थ स्थल के रूप में पहचाना जाता हैं। यहां छत्तीसगढ़ सहित झारखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से लोगों का आना-जाना लगा रहता हैं। यहां आकर लोग वापस जाना नहीं चाहते हैं। इस मंदिर की खास बात हैं,कि यहां जीव बलि प्रथा पूर्णतः प्रतिबंधित है। मंदिर में शादी-विवाह सहित धार्मिक अनुष्ठान कराए जाते हैं। चैत्र शारदीय नवरात्रि में मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। इस मौके पर स्थानीय सहित दूरदराज से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
🟠मंदिर का इतिहास
कहते हैं,रामानुजगंज की सरहद के रूप में ये पर्वत वर्षों से अपनी पहचान बना कर रखा हुआ हैं,पर एक समय की एक रहस्यमी घटना ने इस मंदिर की नींव रखवाई, नगर के एक आदिवासी युवक अशोक गोंड के सपने में माता रानी ने आकर बताया,कि मैं इस पर्वत पर एक वृक्ष में विराजमान हूं जिसके बाद युवक ने सबसे पहले अपने कुछ दोस्तों को ये बात बताई जिसके बाद उन्होंने उस दुर्गम और कठिन पहाड़ की चढ़ाई करने की ठानी और अंततः पहुंचे उस पहाड़ की छोटी पर जहां उन्होंने स्वपन में दिखे उस वृक्ष को देखा फिर तुरंत नगर के गणमान्य लोगों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद युवक के अथक प्रयास और शहर के लोगों के सहयोग से आज यह मंदिर लोगो की मन्नते पूरी कर रहा हैं।
🟠श्रमदान कर किया सड़क व सीढ़ी निर्माण
शुरुआत में लोगों को टेढ़े-मेढ़े रास्ते से होते हुए मंदिर जाना पड़ता था। इस परेशानी से छुटकारा पाने लोगों ने श्रमदान, चंदा कर सड़क बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए स्थानीय नगरवासियों की बैठक बुलाकर बैठक में लोगों ने आपस में चंदा एकत्रित कर सड़क बनाने की ठानी। देखते ही देखते वर्ष 2016 में नगरवासियों के सहयोग से पहाड़ के नीचे से मंदिर जाने तक सीसी रोड का निर्माण कर लिया गया। बाद में सीढ़ी भी बनाई गई। उस समय नगरवासियों ने अपने-अपने नाम से सीढ़ियों का निर्माण कराया था।
कुछ समय बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों एवं व्यवसायी वर्ग के सहयोग से अब पूर्ण विकसित सर्वसुविधायुक्त आकर्षक मन्दिर बन चुका हैं। यहां तक आसानी से पैदल, दो पहिया एवं चार पहिया वाहनों से पहुंचा जा सकता हैं।
पहाड़ी मंदिर के पुजारी पवन पांडेय बताते हैं,कि पहाड़ी माई मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था हैं। मान्यता हैं,कि जो लोग अपनी सच्चे मन से मुरादें लेकर आते हैं,वो पूरी होती हैं। यहां नवरात्र में भक्तों का तांता लगा रहता हैं।
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