संदिली सिंह,अंबिकापुर,21नवंबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
अंबिकापुर ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बना,जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा दी। जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और संघर्षों को समर्पित यह उत्सव एक पूरे राज्य के उत्साह और गर्व का प्रतीक बना।
कार्यक्रम में अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा,कि भारत के इतिहास में जनजातीय समुदायों का योगदान अमिट और गौरवशाली हैं। उन्होंने उदाहरण दिया — बस्तर का प्रसिद्ध ‘मुरिया दरबार’, जिसे आदिम लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतीक माना जाता हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा दिखाती हैं,कि लोकतंत्र भारत की आत्मा में सदियों से बसता आया हैं।
राष्ट्रपति ने कहा,कि छत्तीसगढ़,ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में जनजातीय विरासत सिर्फ संस्कृति नहीं, बल्कि जीवन शैली का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी सराहा कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में 1 से 15 नवंबर तक मनाया गया ‘जनजातीय गौरव पखवाड़ा’ पूरे राज्य में उत्साह का केंद्र बना और लाखों लोगों ने भागीदारी की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय विकास के लिए पिछले वर्षों में चलाए गए बड़े अभियानों का उल्लेख किया—धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जिसका लाभ 5 करोड़ से ज्यादा जनजातीय नागरिकों तक पहुँच रहा हैं।पीएम-जनमन अभियान, जो देश की 75 पीवीटीजी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक विकास का नया अध्याय लिख रहा हैं।
उन्होंने बताया,कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर शुरू किए गए ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के तहत देशभर में करीब 20 लाख स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा हैं, जो जनजातीय समाज तक सरकारी योजनाओं को और सुगमता से पहुँचाएगा।
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद की घटती गतिविधियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोग अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं और विकास की रोशनी को अपना रहे हैं। हाल ही में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ में 1.65 लाख प्रतिभागियों की भागीदारी को उन्होंने छत्तीसगढ़ की ऊर्जा और एकजुटता का प्रतीक बताया।अंत में उन्होंने कहा,कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय महापुरुषों की प्रेरणा और जनता की दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर देश को ‘विकसित भारत’ की ओर और तेज़ी से ले जाएगी।












