संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,24जनवरी2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
नवा रायपुर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्यिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ आगे बढ़ रहा हैं। उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में महिला साहित्यकारों के विशेष काव्य-पाठ सहित काव्य एवं व्यंग्य के विविध सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 90 से अधिक नवोदित एवं समकालीन रचनाकारों ने सहभागिता की।
रायपुर साहित्य महोत्सव के वृहद आयोजन के तहत जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान, छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान एवं छत्तीसगढ़ मित्र के संयुक्त तत्वावधान में महिला साहित्यकारों का विशेष काव्य-पाठ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष डॉ. सीमा निगम ने किया। इस अवसर पर संस्थान की संरक्षक डॉ. रश्मिलता मिश्रा, शशि सुरेंद्र दुबे तथा छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष शकुंतला तरार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहीं। मंच संचालन डॉ. सीमा अवस्थी एवं सुमन शर्मा बाजपेयी ने किया।
🟠लोक-संस्कृति से नारी सशक्तिकरण तक कविता का विस्तार
महिला साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, नदियों की महिमा, सामाजिक सरोकार, नारी सशक्तिकरण, मानवीय संवेदनाएं एवं राष्ट्रभक्ति जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस सत्र में विमला माहेश्वरी, भारती यादव मेधा, पूर्वा श्रीवास्तव, पल्लवी झा, नंदिनी लहेज, दिलशाद सैफी, अनिता झा, अनामिका शर्मा ‘शशि’, प्रमदा ठाकुर, सुषमा प्रेम पटेल, पूर्णिमा तिवारी, शुभ्रा ठाकुर, धरा देवांगन, शकुंतला तिवारी, सीमा पांडेय, डॉ. ज्योति दीवान, डॉ. संध्या रानी शुक्ला, नलिनी बाजपेयी, अंजना भाके ‘कनुप्रिया’, शशि तिवारी, डॉ. तुलेश्वरी धुरंधर, प्रतिमा बनर्जी, दुर्गा पाठक, आभा श्रीवास्तव, मंजूषा अग्रवाल, कल्याणी तिवारी, प्रीति मिश्रा, चंद्र प्रभा दुबे, चंद्रकला त्रिपाठी, अर्चना जैन, खिलेश गौर सहित अनेक साहित्यकारों ने काव्य-पाठ किया। आभार प्रदर्शन डॉ. मृणालिका ओझा ने किया।
🟠काव्य और व्यंग्य सत्र बने आकर्षण का केंद्र
उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में आयोजित अन्य सत्रों में सामूहिक काव्य-पाठ एवं व्यंग्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
धमतरी से डूमनलाल ध्रुव के नेतृत्व में 15 सदस्यीय दल ने ग्रामीण एवं लोक संवेदनाओं से जुड़ी कविताएं प्रस्तुत कीं। रायपुर से राजशेखर चौबे के नेतृत्व में 9 रचनाकारों ने समकालीन विषयों पर व्यंग्य रचनाएं सुनाईं। महासमुंद से अशोक शर्मा के नेतृत्व में 12 सदस्यीय समूह ने आंचलिक संस्कृति को स्वर दिया, जबकि रायपुर के आशीष सिंघानिया के 7 सदस्यीय समूह ने युवा सोच और नवीन प्रयोगों से युक्त कविताओं का पाठ किया।
दिनभर चले इन साहित्यिक सत्रों में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। प्रत्येक प्रस्तुति पर मिली तालियों ने रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। आयोजकों के अनुसार रायपुर साहित्य उत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को सशक्त करने वाला एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन बनता जा रहा हैं।












