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हिंसा से हुनर तक : जब बंदूक छोड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर चले आत्मसमर्पित माओवादी

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,7फरवरी 2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis Newsअगर मन में बदलाव की सच्ची चाह हो,तो अंधेरे रास्तों से भी उजाले की ओर लौटा जा सकता हैं। इस कथन को आज बस्तर अंचल में आत्मसमर्पित माओवादी साकार कर रहे हैं। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा का रास्ता चुना था,आज वही हाथ हुनर सीखकर सम्मानजनक जीवन की नींव रख रहे हैं।राज्य शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जा रहा हैं। ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित कैंप में ‘हिंसा से हुनर’ की दिशा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा हैं।

🟠आजीविका के लिए मिल रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण

कभी माओवादी गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग,सिलाई,काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं। उद्देश्य यह हैं,कि वे समाज में लौटकर आत्मनिर्भर बन सकें और सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

🟠चौगेल कैंप बना ‘कौशलगढ़’

वर्षों तक लाल आतंक का दंश झेल चुके बस्तर संभाग में अब बदलाव की बयार बह रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से माओवाद का दायरा सिमट रहा हैं,और हथियार उठाने वालों को भविष्य संवारने का अवसर मिल रहा हैं।आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के तहत भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे चौगेल (मुल्ला) के बीएसएफ कैंप परिसर को ‘कौशलगढ़’ के रूप में विकसित किया गया है। यहां 20-20 के बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं। साथ ही निरक्षर युवाओं को कक्षा पहली से आठवीं तक की शिक्षा भी प्रदान की जा रही हैं।🟠“ड्राइविंग सीखने का सपना अब पूरा हो रहा”

चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी मनहेर तारम बताते हैं,कि वर्षों पुरानी ड्राइविंग सीखने की इच्छा अब पूरी हो रही हैं।वहीं नरसिंह नेताम, सुकदू पद्दा और कु. काजल वेड़दा जैसे युवा-युवतियां सिलाई, ड्राइविंग और शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। काजल बताती हैं कि उन्हें बचपन से सिलाई का शौक था, जो अब साकार हो रहा है।कैंप में रह रहे अन्य आत्मसमर्पित माओवादी भी अपनी रुचि अनुसार ड्राइविंग, काष्ठशिल्प, सिलाई मशीन एवं सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाइयों की सुविधा और मनोरंजन के लिए खेल व सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।

🟠भविष्य की तैयारी

पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी विनोद अहिरवार ने बताया,कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में मशरूम उत्पादन, बागवानी और अन्य स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों की भी शुरुआत की जाएगी।

यह पहल न केवल आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में बदलाव ला रही हैं,बल्कि बस्तर को शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। राज्य शासन द्वारा दिया गया यह अवसर उनके लिए नई शुरुआत और सम्मानजनक भविष्य का आधार बन रहा हैं।

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