संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,18फरवरी 2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
होली के रंग इस बार बस्तर में सेहत और पर्यावरण के अनुकूल होंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं।सब्जियों और फूलों से निकाले गए प्राकृतिक रंगों में गुलाब, गेंदा, पलाश की पंखुड़ियां, गुलाब जल और इत्र मिलाकर यह विशेष गुलाल बनाया जा रहा हैं। पलाश के फूलों से केसरिया, पालक भाजी से हरा और लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा हैं। चूंकि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं किया जा रहा, इसलिए यह त्वचा, आंख और बालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं।
🟠बस्तर में महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण
जगदलपुर स्थित क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धति से प्राकृतिक गुलाल निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया।महिलाएं अपनी रसोई और बाड़ी में उपलब्ध पालक, लाल भाजी, चुकंदर और फूलों का उपयोग कर सतरंगी गुलाल तैयार कर रही हैं। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों से होने वाली एलर्जी और त्वचा रोगों से बचाव के लिए कॉर्न फ्लावर बेस में प्राकृतिक अर्क मिलाकर इको-फ्रेंडली गुलाल बनाया जा रहा हैं।
🟠1000 किलो तक उत्पादन का लक्ष्य
प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने इस वर्ष 500 से 1000 किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा हैं। उत्पाद को आमजन तक पहुंचाने के लिए जगदलपुर के प्रमुख स्थानों, शासकीय कार्यालयों और जनपद स्तर के बाजारों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे।यह पहल केवल रंगों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि महिलाओं के स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम है। इससे बस्तर की महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और लोगों को सुरक्षित व रसायन-मुक्त होली मनाने का विकल्प मिलेगा।












