संदिली सिंह,जशपुर,छत्तीसगढ़,5जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और हरियाली के लिए पहचान रखने वाला जशपुर जिला,आज पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक कहानी के कारण चर्चा में हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खरसोता ने बीते 15 वर्षों में जनभागीदारी के बल पर वन संरक्षण का ऐसा मॉडल विकसित किया हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है।एक समय था जब जंगलों में आग लगने और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण क्षेत्र की हरियाली तेजी से खत्म हो रही थी। लेकिन ग्रामीणों की जागरूकता, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों ने हालात पूरी तरह बदल दिए। आज खरसोता का जंगल न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि यहां का पर्यावरण, जलस्तर और जैव विविधता भी पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई हैं।
🟠2010 में शुरू हुई थी हरियाली बचाने की मुहिम
ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच श्याम लाल भगत की पहल पर वर्ष 2010 में जंगलों को आग और अवैध कटाई से बचाने के लिए वन अग्नि सुरक्षा समिति और वन सुरक्षा समिति का गठन किया गया था। इन समितियों ने गांव के लोगों को साथ लेकर जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली।शुरुआत में यह प्रयास एक छोटी पहल थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण का मजबूत अभियान बन गया।
🟠पेड़ काटने पर जुर्माना, दोबारा गलती पर सामाजिक बहिष्कार
वन संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए समिति ने सख्त नियम बनाए। यदि कोई व्यक्ति जंगल से अवैध रूप से पेड़ काटता है या नुकसान पहुंचाता हैं,तो उस पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता हैं।यदि वही व्यक्ति दोबारा नियम तोड़ता है तो उसके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार जैसी कड़ी कार्रवाई की जाती हैं। इन नियमों का ग्रामीण पूरी गंभीरता से पालन करते हैं, जिसके कारण वर्षों से वन क्षेत्र सुरक्षित बना हुआ हैं।
🟠बढ़ा भूजल स्तर, मिली स्वच्छ हवा और बेहतर स्वास्थ्य
लगातार संरक्षण के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। गांव के आसपास के जंगल घने और हरे-भरे हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र बढ़ने से वातावरण शुद्ध हुआ हैं, गर्मी का प्रभाव कम हुआ है और भूजल स्तर में भी सुधार आया हैं।ग्रामीण जगदीश राम बताते हैं कि अब गांव में स्वच्छ हवा और पर्याप्त हरियाली हैं। मकानों की मरम्मत के लिए भी लोगों को लकड़ी की समस्या नहीं होती। समिति की अनुमति और निर्धारित शुल्क जमा कर ग्रामीण अपनी जरूरत के अनुसार लकड़ी प्राप्त कर सकते हैं।
🟠 47 हेक्टेयर जंगल की सुरक्षा कर रहे ग्रामीण
इस अभियान के जनक और पूर्व सरपंच श्याम लाल भगत बताते हैं,कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगभग 47 हेक्टेयर वन भूमि हैं। पिछले 15 वर्षों से ग्रामीण मिलकर इसकी सुरक्षा कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि जब यह अभियान शुरू किया गया था, तब बहुत कम लोगों को इसकी सफलता पर भरोसा था, लेकिन आज इसका परिणाम सभी के सामने हैं। गांव के आसपास का क्षेत्र हराभरा हो चुका हैं और पर्यावरण संरक्षण की यह पहल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
🟠जनभागीदारी से ही संभव हैं,पर्यावरण संरक्षण
खरसोता के ग्रामीण जंगलों को अपनी संपत्ति मानते हैं और उसकी सुरक्षा के लिए हर समय तैयार रहते हैं। यही कारण हैं,कि यहां वन संरक्षण किसी सरकारी योजना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह गांव की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुका हैं।
🟠वन मंडलाधिकारी ने बताया प्रेरणादायक उदाहरण
वन मंडलाधिकारी शशि कुमार ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जल संरक्षण और वन संरक्षण जैसे विषयों पर जनजागरूकता सबसे बड़ा समाधान हैं। उन्होंने कहा कि खरसोता गांव का मॉडल बताता हैं, कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो पर्यावरण संरक्षण के बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।












