संदिली सिंह,राउरकेला,ओडिशा,5जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश के प्रमुख इस्पात संयंत्रों में शामिल Rourkela Steel Plant (RSP) ने,पर्यावरण संरक्षण और सतत औद्योगिक विकास के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई हैं। आधुनिक तकनीक, संसाधनों के कुशल उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में किए जा रहे,प्रयासों ने आरएसपी को देश के अग्रणी पर्यावरण-अनुकूल इस्पात संयंत्रों में स्थापित किया हैं।
🟠ग्रीन स्टील उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
आरएसपी ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए इस्पात निर्माण प्रक्रिया में उत्पन्न अपशिष्ट गैसों का उपयोग कैप्टिव पावर प्लांट के बॉयलरों में शुरू किया हैं। इससे कोयले की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने में मदद मिल रही हैं।इसके साथ ही ब्लास्ट फर्नेस-1 में बायोचार इंजेक्शन का परीक्षण भी किया जा रहा हैं। यह पहल पारंपरिक कार्बन स्रोतों के स्थान पर जैविक एवं नवीकरणीय विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा देती हैं, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव कम हो सके।
🟠अपशिष्ट प्रबंधन में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
संयंत्र द्वारा ब्लास्ट फर्नेस स्लैग का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा हैं। वहीं बीओएफ और एसएमएस स्लैग को विभिन्न निर्माण कार्यों एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं में उपयोगी सामग्री के रूप में परिवर्तित किया जा रहा हैं।यह पहल न केवल अपशिष्ट को कम कर रही हैं, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा दे रही हैं।
🟠जल संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि
वित्तीय वर्ष 2025-26 में आरएसपी ने जल संरक्षण के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया हैं। प्रति टन कच्चे इस्पात उत्पादन पर जल खपत घटकर केवल 2.94 घन मीटर रह गई, जो संयंत्र के इतिहास में सबसे कम स्तर माना जा रहा हैं।साथ ही “जीरो लिक्विड डिस्चार्ज” लक्ष्य को हासिल करने के लिए अतिरिक्त जल शोधन प्रणालियों का विकास भी किया जा रहा हैं।
🟠52 लाख से अधिक पौधारोपण
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तहत आरएसपी अब तक संयंत्र और आसपास के क्षेत्रों में 52 लाख से अधिक पौधे लगा चुका हैं। राउरकेला स्टील सिटी का हरित वातावरण इस अभियान की सफलता का जीवंत उदाहरण माना जाता हैं।
🟠स्वच्छ भविष्य की दिशा में मजबूत कदम
विश्व पर्यावरण दिवस पर आरएसपी ने संदेश दिया कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। हरित तकनीक, संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण ही भविष्य के सतत विकास की कुंजी हैं।












