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एक करोड़ का रीपा बना रहस्य और बदहाली का प्रतीक, लाखों की मशीनें गायब, आरटीआई में अधूरी जानकारी से उठे भ्रष्टाचार के सवाल

न्यूज डेस्क,मुकडेगा,लैलूंगा,8जून2026ग्रामीणों को रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई,रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) योजना रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के मुकडेगा में सवालों के घेरे में आ गई हैं। वर्ष 2022-23 में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया यह रीपा आज बदहाल और वीरान पड़ा हैं। जिस परिसर को ग्रामीण उद्योगों का केंद्र बनना था, वहां अब जर्जर भवन, उखड़े हुए शेड, गायब मशीनें और प्रशासनिक चुप्पी नजर आ रही हैं।सबसे बड़ी बात यह हैं,कि सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूर्ण और भुगतान जारी होना बताया गया हैं, लेकिन धरातल पर हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं।

🟠आरटीआई ने खोली परतें, लेकिन बढ़ गए सवाल

इस पूरे मामले को सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से सामने लाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार ठाकुर ने बताया,कि जनपद पंचायत से प्राप्त दस्तावेजों में निर्माण कार्य पूर्ण और राशि आहरित होना दर्शाया गया हैं।लेकिन जब मशीनों की खरीदी, आपूर्ति, भुगतान और स्थापना से जुड़ी जानकारी मांगी गई, तब संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।यहीं से मामला और संदिग्ध हो जाता है।यदि मशीनें खरीदी गईं और स्थापित भी हुईं, तो—

🔸️ वे अब कहां हैं?

🔸️ उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?

🔸️ मशीनों का पूरा रिकॉर्ड क्यों नहीं दिया गया?

🔸️ भुगतान किस आधार पर किया गया?

🔸️लाखों की मशीनें आईं, फिर गायब कैसे हो गईं?जानकारी के अनुसार मुकडेगा रीपा में रोजगार गतिविधियों के लिए कई मशीनें स्थापित की गई थीं, जिनमें—

🔸️ राइस मिल मशीन

🔸️ तेल मिल मशीन

🔸️ मशरूम ड्रायर मशीन

🔸️ मिट्टी के बर्तन निर्माण मशीन शामिल थीं।

ग्राम संगठन सचिव अहिल्या सिदार के अनुसार मशीनों की खरीदी के लिए लगभग 10 से 12 लाख रुपये का भुगतान अंबिकापुर की एक कंपनी को चेक के माध्यम से किया गया था।लेकिन वर्तमान में अधिकांश मशीनें परिसर में दिखाई नहीं देतीं।स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी हैं,कि कुछ मशीनें गायब हो गई हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई हैं।

🟠भुगतान हुआ, लेकिन लिखित हैंडओवर नहीं?

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह हैं,कि ग्राम संगठन के पदाधिकारियों का कहना हैं,कि उन्हें मशीनों का कोई लिखित हैंडओवर नहीं दिया गया था।

यदि ऐसा हैं तो बड़ा सवाल यह हैं,कि—

🔸️ ग्राम संगठन के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान कैसे किया गया?

🔸️भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर हुई?

🔸️ मशीनों का स्वामित्व और संरक्षण किसके जिम्मे था?

🔸️ यदि मशीनें गायब हैं तो जवाबदेह कौन हैं?

🟠 कागजों में गार्डन और फेंसिंग, जमीन पर नहीं दिखते निशान🟠आरटीआई में प्राप्त दस्तावेजों में रीपा परिसर में—

🔸️गार्डन निर्माण

🔸️तार फेंसिंग/बाउंड्रीवाल

🔸️सौंदर्यीकरण कार्य

🔸️ गांधी प्रतिमा

🔸️ बोर खनन जैसे कार्यों का उल्लेख किया गया हैं।लेकिन वर्तमान स्थिति में परिसर में इन कार्यों के स्पष्ट प्रमाण नजर नहीं आते।स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि यदि इन कार्यों पर राशि खर्च हुई हैं,तो उनकी वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

🟠करोड़ों की संपत्ति देखरेख के अभाव में बर्बाद

रीपा परिसर के कई भवन आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं।

🔸शेड उखड़ चुके हैं।

🔸दरवाजे और अन्य सामग्री गायब बताई जा रही हैं।

🔸भवनों में रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता हैं।

🔸परिसर सुनसान और उपयोगहीन पड़ा हैं।

जिस योजना से ग्रामीणों को रोजगार मिलना था, वह आज खुद संरक्षण की मोहताज नजर आ रही हैं।

🟠अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह

जब इस मामले को लेकर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कैमरे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।मशीनों की खरीदी, भुगतान और उनके गायब होने जैसे सवालों पर अधिकारियों की चुप्पी अब चर्चा का विषय बन गई हैं।

🟠आखिर जिम्मेदार कौन?

आज सबसे बड़ा सवाल यही हैं,कि

🔸️करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रीपा बंद क्यों पड़ा है?

🔸️मशीनें कहां गईं?

🔸️सरकारी संपत्ति की सुरक्षा किसने सुनिश्चित करनी थी?

🔸️यदि चोरी हुई तो मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ?

🔸️आरटीआई में पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

🔸️क्या पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच होगी?

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