न्यूज डेस्क,राउरकेला,उड़ीसा,8जून2026
देशभर में स्मार्ट सिटी और स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बनाने की कोशिश कर रहा,राउरकेला इन दिनों एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा हैं। शहर के कई प्रमुख इलाकों, आवासीय बस्तियों, सड़क किनारों और खाली मैदानों में फैले कचरे के ढेर स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। जिस शहर को आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहां गंदगी अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि कई वार्डों में नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा हैं। खुले में पड़े कचरे से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा हैं। वहीं बरसात के मौसम से पहले मच्छरों और कीटों की बढ़ती संख्या ने डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा दिया हैं।
🟠हर दिन निकल रहा 150 टन तक कचरा
जानकारी के अनुसार राउरकेला महानगर निगम (RMC) क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 140 से 150 टन कचरा निकलता हैं। इसके प्रबंधन के लिए शहर में 8 माइक्रो कम्पोस्टिंग सेंटर (MCC) और मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) संचालित हैं। लेकिन इनकी क्षमता शहर में उत्पन्न होने वाले कुल कचरे की तुलना में कम पड़ रही हैं।बताया जा रहा हैं,कि प्रतिदिन 30 से 40 टन कचरे का पूरी तरह निस्तारण नहीं हो पाता, जिसके कारण कई स्थानों पर कचरे का अंबार जमा हो जाता हैं। यही कारण हैं,कि स्वच्छता अभियान चलने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
🟠कागजों में स्वच्छता, जमीन पर गंदगी?
शहर में स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान, दीवार लेखन, प्रतियोगिताएं और प्रचार-प्रसार कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह हैं,कि जब जमीनी स्तर पर कचरा प्रबंधन की स्थिति कमजोर हैं, तो इन अभियानों का वास्तविक लाभ कितना मिल रहा हैं?कई नागरिकों का आरोप है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान विशेष अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन पूरे साल एक समान सफाई व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन सफल नहीं हो पा रहा हैं।
🟠 बड़ा सवाल
जब स्मार्ट सिटी का दर्जा प्राप्त शहर में ही सड़क किनारे और मोहल्लों में कचरे के ढेर लगे हों, तो आम नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण कैसे मिलेगा? क्या स्वच्छता केवल रैंकिंग और रिपोर्ट तक सीमित रह जाएगी या फिर शहर को वास्तव में साफ बनाने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे?












