संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,15जून2026
छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों को पुनर्जीवित करने और उनके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया हैं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को, मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें प्रदेश की प्रमुख नदियों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरुद्धार से जुड़े कार्यों की गहन समीक्षा की गई।बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि नदियों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का मिशन हैं। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया,कि हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप नदियों के पुनर्जीवन कार्यों को प्राथमिकता के साथ अमल में लाया जाए और इसे जनभागीदारी से जोड़कर एक व्यापक अभियान का रूप दिया जाए।
🟠नदी किनारे होंगे जनहित के विकास कार्य
मुख्य सचिव ने कहा,कि नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे कार्य किए जाएं, जिनसे जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलग्रहण क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से कार्ययोजना बनाकर जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जाए।उन्होंने कहा,कि नदी संरक्षण कार्यों में स्थानीय सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो सकें।
🟠छात्रों को पढ़ाया जाएगा नदियों का इतिहास
बैठक में मुख्य सचिव ने एक अनूठी पहल का सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में उद्गमित होने वाली नदियों के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और भौगोलिक विशेषताओं का दस्तावेजीकरण किया जाए। स्कूलों के विद्यार्थियों को नदी उद्गम स्थलों का भ्रमण कराया जाए और नदी संरक्षण विषय पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं।उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी में जल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा नदियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
🟠नदी उद्गम स्थलों पर होंगे मेले और जनजागरूकता कार्यक्रम
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी उद्गम स्थलों को पहचान देकर वहां मेला, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का नदियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा।
🟠वृक्षारोपण और जल संरक्षण को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, वाटर रिचार्ज, जल संरक्षण संरचनाओं और छोटे-छोटे जलस्रोतों के विकास पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए मनरेगा, डीएमएफ, कैम्पा, जल संसाधन और अन्य विभागों के माध्यम से समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
🟠नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के निर्देश
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा,कि किसी भी नदी में औद्योगिक, घरेलू या अन्य प्रकार के अपशिष्ट न डाले जाएं। इसके लिए लगातार निगरानी, निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ नदी ही स्वस्थ समाज और मजबूत पर्यावरण की आधारशिला हैं।
🟠विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
बैठक में जल संरक्षण विशेषज्ञ प्रो. डॉ. एम.के. वर्मा तथा एनआईटी के जल विज्ञानी प्रो. इश्तियाक अहमद ने नदी संरक्षण, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव प्रस्तुत किए।बैठक में जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन, खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केंद्रीय भू-जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।












