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छत्तीसगढ़ में 29 जून से शुरू होगा ‘सहकारी सप्ताह’, सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी

न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,28जून2026

छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा देने और इसे जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से,राज्य सरकार 29 जून से 6 जुलाई तक ‘सहकारी सप्ताह’ का आयोजन करने जा रही हैं। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला यह विशेष अभियान पूरे प्रदेश में जिला, विकासखंड, सोसायटी और पैक्स स्तर तक व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। अभियान के तहत रायपुर में 3 और 4 जुलाई को राज्य स्तरीय भव्य समारोह आयोजित होगा, जबकि प्रदेशभर में सहकारिता से जुड़े अनेक जनजागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और सदस्यता अभियान चलाए जाएंगे।

🟠’सहकार से समृद्धि’ को मिलेगा नया विस्तार

राज्य सरकार का उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को गांव-गांव तक पहुंचाना हैं। इसके लिए सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों को सहकारिता के लाभ, रोजगार के अवसर और आर्थिक सशक्तिकरण की जानकारी दी जाएगी।सहकारी सप्ताह के दौरान नए सदस्यों को जोड़ने के लिए विशेष सदस्यता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहकारिता की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंच सके।

🟠गांव-गांव तक पहुंचेंगे जागरूकता अभियान

सप्ताहभर चलने वाले इस अभियान में सहकारी समितियों की भूमिका को मजबूत बनाने, किसानों को नई योजनाओं से जोड़ने, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सहकारी संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।

🟠रायपुर में होगा राज्य स्तरीय आयोजन

3 और 4 जुलाई को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान, महिला समूह और सहकारी संस्थाओं के सदस्य शामिल होंगे। इस दौरान सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।सहकारिता क्षेत्र से जुड़े पदाधिकारियों ने इस अभियान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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