न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,30जून2026
सरगुजा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान,रामगढ़ एक बार फिर उत्सव के रंग में रंग गया। आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर 50वें रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया। लोक संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन के अद्भुत संगम बने इस आयोजन ने पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया।उद्घाटन समारोह में स्कूली बच्चों और स्थानीय लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया, जबकि नई दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा मंचित भव्य रामलीला ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंगों को जीवंत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा,कि रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक चेतना का जीवंत प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस धरोहर को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही हैं।उन्होंने कहा,कि 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुका रामगढ़ महोत्सव आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका हैं। यह आयोजन सरगुजा की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
महोत्सव के दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटक विश्व की प्राचीनतम रंगशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ इन धरोहरों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता से भी लोगों को अवगत करा रहे हैं।सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा,कि रामगढ़ वह पावन भूमि हैं,जहां भगवान श्रीराम के वनवास और महाकवि कालिदास की अमर कृति ‘मेघदूतम्’ की ऐतिहासिक स्मृतियां आज भी जीवित हैं। वहीं विधायक प्रबोध मिंज ने इसे सरगुजा की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और वैश्विक प्रचार पर जोर दिया।
कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा,कि रामगढ़ महोत्सव स्थानीय कलाकारों, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का सशक्त माध्यम बन चुका हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी विकसित होंगे।महोत्सव का समापन समारोह 30 जून को आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे।












