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चलती बस में गूंजी नवजात की किलकारी : महिला यात्रियों की सूझबूझ से हुआ सुरक्षित प्रसव,मां-बेटा दोनों स्वस्थ

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,7जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इंसानियत और संवेदनशीलता की एक भावुक तस्वीर सामने आई हैं। कोरबा से बिहार के पटना जा रही एक स्लीपर बस में, सफर के दौरान प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला ने स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। बस में मौजूद महिला यात्रियों ने हिम्मत, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सुरक्षित प्रसव कराया। नवजात की पहली किलकारी गूंजते ही पूरी बस तालियों और खुशियों से गूंज उठी।🟠सफर के बीच शुरू हुई प्रसव पीड़ा

जानकारी के अनुसार राजहंस ट्रेवल्स की स्लीपर बस 6 जुलाई को कोरबा से पटना के लिए रवाना हुई थी। बस अंबिकापुर और प्रतापपुर होते हुए,बलरामपुर जिले के सेमरसोत मार्ग पर पहुंची थी,तभी अपने पति के साथ सफर कर रही गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति गंभीर होने पर पति ने तत्काल बस स्टाफ और यात्रियों से मदद की गुहार लगाई।

🟠महिला यात्रियों ने संभाली जिम्मेदारी

बस को सुरक्षित स्थान पर रोका गया, जिसके बाद बस में मौजूद सुनती देवी सहित अन्य महिला यात्रियों ने, बिना घबराए प्रसूता की मदद की और आपसी सहयोग से सुरक्षित प्रसव कराया। कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। मां और नवजात के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही बस में मौजूद यात्रियों ने राहत की सांस ली और तालियां बजाकर खुशी जताई।

🟠यात्रियों ने दिया आशीर्वाद और आर्थिक सहयोग

इस भावुक पल के दौरान कई यात्रियों ने नवजात को आशीर्वाद देते हुए,उसके पिता को शुभकामना स्वरूप नकद राशि भी भेंट की। पहले पिता ने राशि लेने से इनकार किया, लेकिन यात्रियों ने इसे शुभ अवसर बताते हुए स्वीकार करने का आग्रह किया। इस मानवीय घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

🟠बलरामपुर जिला अस्पताल में भर्ती

प्रसव के करीब आधे घंटे बाद बस बलरामपुर जिला अस्पताल पहुंची, जहां जच्चा और नवजात को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार शुरू किया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बाद बस अपने अन्य यात्रियों को लेकर पटना के लिए रवाना हो गई।चलती बस में सुरक्षित प्रसव की यह घटना दिखाती है कि संकट की घड़ी में संवेदनशीलता, साहस और आपसी सहयोग किसी की जिंदगी बदल सकता हैं। महिला यात्रियों की तत्परता ने एक संभावित जोखिम को सुखद यादगार पल में बदल दिया।

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