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धान की बुवाई का सही समय,कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को अहम सलाह, इन तकनीकों से बढ़ेगा उत्पादन और घटेगी लागत

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,8जुलाई 2026

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बलरामपुर के,कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की हैं। वैज्ञानिकों ने कहा हैं,कि समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान धान की बेहतर पैदावार के साथ उत्पादन लागत भी कम कर सकते हैं। खेत की परिस्थितियों के अनुसार लेही, ड्रम सीडर और छिटकवा पद्धति से धान की बुवाई करने की सलाह दी गई हैं।🟠खेत की स्थिति के अनुसार अपनाएं सही तकनीक

वैज्ञानिकों के अनुसार जिन खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और नर्सरी तैयार हो चुकी हैं,वहां धान की रोपाई शुरू कर दें। वहीं जिन क्षेत्रों में लगातार बारिश और अधिक जलभराव की स्थिति हैं,वहां लेही पद्धति सबसे अधिक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा किसान ड्रम सीडर और छिटकवा विधि से भी धान की सीधी बुवाई कर सकते हैं।

🟠बीज उपचार से मिलेगा बेहतर अंकुरण

कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी हैं,कि बुवाई या रोपाई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम जैसे कवकनाशी एवं जैव उर्वरकों से उपचार अवश्य करें। इससे बीजजनित रोगों से सुरक्षा मिलेगी, अंकुरण बेहतर होगा और फसल स्वस्थ विकसित होगी।

🟠हरेली तिहार तक पूरी करें बुवाई

🔸️वैज्ञानिकों ने किसानों को समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी हैं।

🔸️15 जुलाई तक धान की सीधी बुवाई पूरी करें।

🔸️30 जुलाई तक रोपा एवं बियासी पद्धति का कार्य समाप्त करें।

🔸️हरेली तिहार तक खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई पूर्ण करना बेहतर उत्पादन के लिए लाभकारी रहेगा।

🟠हरी खाद और नील-हरित शैवाल का करें उपयोग

वैज्ञानिकों ने बताया,कि रासायनिक उर्वरकों के साथ हरी खाद और नील-हरित शैवाल का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती हैं। एक एकड़ में नील-हरित शैवाल के उपयोग से लगभग एक बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होती हैं,जिससे उर्वरक पर होने वाला खर्च कम होता हैं,और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती हैं।

🟠इन उन्नत किस्मों की खेती होगी फायदेमंद

किसानों को जल्द एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई हैं। इनमें इंद्रावती, बस्तर धान, छत्तीसगढ़ बरसानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1156, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-979 और महामाया प्रमुख हैं।

🟠शुरुआती 40 दिन रखें विशेष सावधानी

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा,कि बुवाई के बाद शुरुआती 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना बेहद जरूरी हैं। समय पर खरपतवार नियंत्रण से पौधों की बढ़वार बेहतर होती हैं,और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती हैं। किसानों से मौसम के अनुसार कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करने की भी अपील की गई हैं।

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