28 साल बाद हत्या कर फरार आरोपी गिरफ्तार : रायगढ़ से दबोचा गया 1998 के मर्डर केस का आरोपी, पुलिस व्यवस्था पर भी उठे सवाल

न्यूज डेस्क,रायगढ़,छत्तीसगढ़,10जुलाई 2026

करीब 28 वर्षों से फरार चल रहे हत्या के आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं। झारसुगुड़ा जिले के रेंगाली थाना क्षेत्र में वर्ष 1998 में हुए,चर्चित हत्या कांड के आरोपी नीलमणि महानंद (51) को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से गिरफ्तार किया गया। आरोपी फर्जी पहचान बनाकर “राजू गोंडा” नाम से रह रहा था और फर्जी आधार कार्ड के सहारे पिछले दो वर्षों से सामान्य जीवन बिता रहा था।पुलिस के मुताबिक, 9 अक्टूबर 1998 को पुरानी रंजिश के चलते आरोपी ने अपने साथियों के साथ दुर्योधन दीप की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को बोरे में भरकर केलो नदी में फेंक दिया गया था। इस मामले में नीलमणि महानंद, राम खड़िया और लेची उर्फ विश्वनाथ कहार आरोपी बनाए गए थे।

🟠थाना से ही फरार हो गया था आरोपी

पुलिस ने घटना के समय नीलमणि महानंद को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन वह शौच जाने का बहाना बनाकर थाना परिसर से फरार हो गया। इसके बाद वह करीब 28 साल तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। मामले के अन्य दोनों आरोपियों की जमानत के बाद मृत्यु हो चुकी हैं।

🟠रायगढ़ में बदल ली थी पहचान

गुप्त सूचना मिलने पर रेंगाली पुलिस ने रायगढ़ में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वह फर्जी दस्तावेजों के सहारे नई पहचान बनाकर रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई की गई।

🟠गिरफ्तारी के साथ व्यवस्था पर भी सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस की सफलता के साथ-साथ व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह हैं,कि जब आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुका था, तो वह थाना परिसर से कैसे फरार हो गया? यदि उस समय सुरक्षा व्यवस्था में चूक नहीं होती, तो पीड़ित परिवार को न्याय के लिए लगभग तीन दशक तक इंतजार नहीं करना पड़ता।यह मामला केवल एक फरार आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पुलिस निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में हुई लंबी देरी की भी याद दिलाता हैं। अब यह मांग उठ रही हैं,कि आरोपी की फरारी के लिए जिम्मेदार तत्कालीन लापरवाही की भी जांच हो।

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