न्यूज डेस्क,राउरकेला,उड़ीसा,17जुलाई 2026
किसानों के हितों और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के,सरकारी दावों के बीच सुंदरगढ़ जिले की स्थिति गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जिले के सभी 17 ब्लॉकों में सहकारिता विस्तार अधिकारी (सीईओ) के, पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कई स्थानों पर यह पद 10 से 17 वर्षों से रिक्त हैं,जिससे किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज, धान खरीदी, पंजीयन और सहकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।
🟠किसानों की समस्याओं का समाधान करने वाला अधिकारी ही नहीं
सहकारिता विस्तार अधिकारी की जिम्मेदारी पैक्स और लैम्प्स की निगरानी, वित्तीय व्यवस्था, कृषि ऋण वितरण, खाद-बीज उपलब्धता और किसानों की शिकायतों के समाधान जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ी होती हैं। लेकिन इन पदों के खाली रहने से पूरी व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रही हैं।
🟠कहीं 3 तो कहीं 17 वर्षों से नहीं हुई नियुक्ति
जिले के कई ब्लॉकों में वर्षों से सीईओ की नियुक्ति नहीं हुई है। सबसे अधिक कुतरा ब्लॉक में 17 वर्षों से यह पद रिक्त हैं,जबकि बिसरा में 16 वर्ष, बणई और गुरुंडिया में 15-15 वर्ष, कोइड़ा में 12 वर्ष तथा कई अन्य ब्लॉकों में 10 वर्ष से अधिक समय से पद खाली पड़े हैं।
🟠अतिरिक्त प्रभार से चल रही व्यवस्था
फिलहाल सहकारिता निरीक्षक और उप सहायक निबंधक अपने नियमित कार्यों के साथ अतिरिक्त रूप से सीईओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा और सहकारी समितियों के कामकाज पर भी असर पड़ रहा हैं।
🟠सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में हो रही देरी
स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि अधिकारियों की कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा हैं। कृषि ऋण, खाद-बीज वितरण, सरकारी अनुदान, धान खरीदी और अन्य सहकारी सेवाओं के लिए किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
🟠 उठ रहे बड़े सवाल
17 वर्षों तक महत्वपूर्ण पद खाली रहना केवल कर्मचारियों की कमी नहीं,बल्कि किसानों के प्रति प्रशासनिक प्राथमिकता पर भी सवाल खड़े करता हैं। अब किसान उम्मीद कर रहे हैं,कि सरकार जल्द स्थायी नियुक्तियां कर सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करेगी, ताकि योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंच सके।












