न्यूज डेस्क,जशपुर,छत्तीसगढ़,25जुलाई 2026
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कार्रवाई की अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए, जशपुर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की हैं। फरसाबहार थाना क्षेत्र में दिव्यांग नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (POCSO), कुनकुरी ने आरोपी गजाधर पैंकरा (62 वर्ष) को दोषी करार देते हुए,20 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1,000 अर्थदंड की सजा सुनाई हैं।यह फैसला फरसाबहार पुलिस की समयबद्ध विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के आधार पर आया।
🟠मूक-बधिर नाबालिग को बहला-फुसलाकर की थी वारदात
पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को पीड़िता की मां ने थाना फरसाबहार में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया,कि उनकी 13 वर्षीय मूक-बधिर बेटी 14 सितंबर को घर से बाहर गई थी। इसी दौरान गांव निवासी गजाधर पैंकरा उसे बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले गया और उसकी दिव्यांगता का फायदा उठाकर दुष्कर्म किया।घर लौटने के बाद बच्ची के व्यवहार में बदलाव देखकर परिजनों ने सांकेतिक संवाद के माध्यम से घटना की जानकारी ली और तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
🟠पुलिस ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य, आरोपी हुआ गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए,फरसाबहार पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया,घटनास्थल का निरीक्षण किया और वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजते हुए न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
🟠न्यायालय ने सुनाई 20 वर्ष की सश्रम कैद
विशेष न्यायाधीश (POCSO) भानूप्रताप सिंह त्यागी ने,मौखिक, चिकित्सकीय, वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(ट) के तहत दोषी ठहराया।न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास, ₹1,000 अर्थदंड तथा अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता को शासन की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने के निर्देश भी दिए।
🟠जशपुर पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति
प्रकरण की विवेचना उप निरीक्षक सुरजन राम पोर्ते एवं सहायक उप निरीक्षक प्रेमिका खलखो ने की। विशेष लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के चलते न्यायालय में अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध साबित करने में सफल रहा।जशपुर पुलिस ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, विशेषकर नाबालिग एवं दिव्यांग बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। त्वरित रिपोर्टिंग,वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को कठोर सजा दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।











