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उधवाकठरा राजस्व सर्वेक्षण पूरा : 88 अतिक्रमण मामलों की प्रारंभिक सूची जारी, 7 अगस्त तक दर्ज कर सकेंगे दावा-आपत्ति

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,25जुलाई 2026

बलरामपुर जिले के राजपुर तहसील अंतर्गत असर्वेक्षित वन ग्राम उधवाकठरा में,लंबे समय से चल रही राजस्व सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन ने, अतिक्रमणकारियों की प्रारंभिक सूची प्रकाशित कर दी हैं। अब इस सूची पर यदि किसी व्यक्ति को कोई दावा या आपत्ति हैं,तो वह 7 अगस्त 2026 तक अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता हैं।यह कार्रवाई राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, नवा रायपुर की अधिसूचना तथा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 67 के प्रावधानों के तहत की गई हैं। प्रशासन का उद्देश्य असर्वेक्षित वन ग्रामों का राजस्व अभिलेख तैयार कर भूमि संबंधी विवादों का पारदर्शी और व्यवस्थित समाधान सुनिश्चित करना हैं।

🟠सर्वेक्षण के बाद तैयार हुई अतिक्रमणकारियों की सूची

राजस्व विभाग के अनुसार तहसील राजपुर के पटवारी हल्का क्रमांक-15 अंतर्गत आने वाले वन ग्राम, उधवाकठरा में राजस्व सर्वेक्षण, ग्राम सीमा निर्धारण, स्थल निरीक्षण और खसरा नंबरों के सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया गया हैं। इसके बाद उपलब्ध अभिलेखों और मौके के सत्यापन के आधार पर अतिक्रमणकारियों की प्रारंभिक सूची तैयार की गई।

🟠सर्वेक्षण में सामने आए ये आंकड़े सर्वेक्षण के दौरान—

🔸️ग्राम में कुल 234 खसरा नंबर दर्ज किए गए।

🔸️कुल राजस्व क्षेत्रफल 141.105 हेक्टेयर पाया गया।

🔸️कुल 88 अतिक्रमण चिन्हित किए गए।

🔸️अतिक्रमण का कुल क्षेत्रफल 100.143 हेक्टेयर दर्ज किया गया।

🔸️राजस्व अधिकारियों के अनुसार यह सूची प्रारंभिक हैं,और दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

🟠7 अगस्त तक दर्ज करा सकेंगे दावा या आपत्ति

प्रशासन ने बताया,कि अतिक्रमणकारियों की प्रारंभिक सूची राजस्व निरीक्षक मंडल परसागुड़ी तथा तहसील कार्यालय राजपुर में,आम नागरिकों के अवलोकन के लिए उपलब्ध करा दी गई हैं।यदि किसी व्यक्ति को सूची में दर्ज जानकारी को लेकर कोई आपत्ति हैं,या अपना दावा प्रस्तुत करना हैं,तो वह 7 अगस्त 2026 तक लिखित आवेदन संबंधित कार्यालय में जमा कर सकता हैं।राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया हैं,कि निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी दावा अथवा आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।

🟠पारदर्शी राजस्व व्यवस्था की दिशा में अहम कदम

जिला प्रशासन का कहना हैं,कि वन ग्रामों के राजस्व सर्वेक्षण से भूमि अभिलेखों को व्यवस्थित किया जा रहा हैं,जिससे भविष्य में भूमि स्वामित्व, सीमांकन और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। साथ ही वास्तविक पात्र लोगों के अधिकार सुरक्षित करने और भूमि संबंधी विवादों के निराकरण में भी यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।प्रशासन ने संबंधित ग्रामीणों से अपील की हैं,कि वे प्रकाशित सूची का अवलोकन अवश्य करें और यदि कोई दावा या आपत्ति हो तो निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करें।

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