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नक्सल हिंसा ने उजाड़ा आशियाना, शासन ने लौटाई जिंदगी की मुस्कान : बलरामपुर के पीड़ित परिवार को मिला पक्का घर

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,28जुलाई 2026

कभी गोलियों की गूंज,भय और बेबसी इस परिवार की पहचान थी। नक्सल हिंसा ने परिवार का सहारा छीन लिया, लेकिन शासन की संवेदनशील पहल ने उनके जीवन में फिर से उम्मीद की रोशनी जगा दी। वर्षों तक कच्ची झोपड़ी में अभाव और असुरक्षा के बीच जीवन गुजारने वाला यह परिवार आज अपने पक्के घर में सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत कर रहा हैं।झारखंड सीमा से लगे बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत चुनचुना निवासी मोहम्मद निमजनी की नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के संदेह में हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी। पीछे रह गईं उनकी पत्नी, छोटे-छोटे बच्चे और संघर्षों से भरा जीवन।

🟠एक घटना ने छीन लिया जीवन का सहारा

परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब मोहम्मद निमजनी की हत्या कर दी गई। कमाने वाला सदस्य खोने के बाद परिवार आर्थिक संकट,असुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता से घिर गया।घने जंगलों के बीच बनी जर्जर झोपड़ी ही उनका आशियाना थी। बरसात में छत से पानी टपकता था, गर्मी में तेज धूप और सर्दियों में ठंडी हवाएं सीधे घर के भीतर आ जाती थीं। हर मौसम उनके संघर्ष को और कठिन बना देता था।

🟠बारिश की हर रात बन जाती थी परीक्षा

मानसून का मौसम परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होता था। तेज बारिश शुरू होते ही पूरा परिवार सामान बचाने और बच्चों को सूखी जगह पर बैठाने में लग जाता था। पूरी रात इस डर में गुजरती कि कहीं कच्ची झोपड़ी ढह न जाए।बच्चों के मन में अक्सर एक ही सवाल उठता था—”क्या हमारा भी कभी पक्का घर होगा?”

🟠मुख्यमंत्री के विशेष प्रोजेक्ट से बदली तकदीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित परिवारों के लिए विशेष आवास परियोजना इस परिवार के लिए नई उम्मीद लेकर आई।जिला प्रशासन ने परिवार की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया और पात्रता के आधार पर उन्हें पक्का आवास स्वीकृत किया। ग्राम पंचायत और प्रशासन के सहयोग से निर्माण कार्य शुरू हुआ और धीरे-धीरे वर्षों का सपना हकीकत में बदल गया।जहां कभी जर्जर झोपड़ी थी, वहां आज मजबूत दीवारों और पक्की छत वाला सुरक्षित घर खड़ा हैं।

🟠अब डर नहीं,भविष्य के सपने हैं

नए घर में रहने के बाद परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया हैं। अब बच्चों को बारिश और तूफान का डर नहीं सताता। परिवार सुरक्षित माहौल में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहा हैं,और भविष्य के नए सपने संजो रहा हैं।

🟠परिवार के बच्चों ने भावुक होकर कहा

“पापा के जाने के बाद लगा था,कि अब हमारी जिंदगी ऐसे ही संघर्षों में बीतेगी। हमने कभी नहीं सोचा था,कि हमारा भी पक्का घर होगा। अब अपने घर में रहते हुए सुरक्षित महसूस होता हैं,और भविष्य के लिए उम्मीद भी जगी हैं।”

🟠विकास की नई पहचान बन रहा हैं,बलरामपुर

यह कहानी केवल एक परिवार को घर मिलने की नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता, भरोसे और पुनर्वास की सफल पहल की मिसाल हैं। नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रोशनी पहुंचाकर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हैं।आज जिस गांव में कभी भय और हिंसा का साया था, वहीं अब विकास, सुरक्षा और विश्वास का नया अध्याय लिखा जा रहा हैं। मजबूत दीवारों वाला यह घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि इस बात का प्रतीक हैं,कि संवेदनशील शासन कठिन परिस्थितियों में जी रहे परिवारों के जीवन में भी खुशियों और सम्मान की नई शुरुआत कर सकता हैं।

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