अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,11अगस्त2026
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के सामरी तहसील अंतर्गत सेरेनगदाग में बालाजी मार्बल एवं टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड को लेकर,स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का दावा हैं,कि करीब 45 स्थानीय श्रमिकों को अचानक काम से हटा दिया गया हैं। साथ ही जमीन देने के बाद ही रोजगार देने का दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया हैं।मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा,कि काम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। उनका दावा हैं,कि हेलमेट, सुरक्षा जूते, ड्रेस और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की कमी के बावजूद उनसे काम कराया जाता रहा हैं। इसके अलावा शासकीय एवं वन भूमि पर डंपिंग किए जाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया हैं।मजदूरों का कहना हैं,कि वे लंबे समय से कंपनी में काम कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें रोजगार से वंचित किया जा रहा हैं। उन्होंने चेतावनी दी हैं,कि यदि सभी 45 मजदूरों को दोबारा काम पर नहीं रखा गया तो माइंस और कंपनी का काम बंद कराने के लिए आंदोलन किया जाएगा।
🟠जमीन देने के बाद रोजगार देने का आरोप
स्थानीय मजदूरों का आरोप हैं,कि कंपनी के जीएम आलोक चतुर्वेदी द्वारा जमीन देने का दबाव बनाया जा रहा हैं। मजदूरों का कहना हैं,कि रोजगार के लिए उनसे जमीन उपलब्ध कराने की बात कही जा रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया,कि सुरक्षा के नाम पर शुरुआत में जूते दिए गए थे,लेकिन उनके खराब होने के बाद नए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।
🟠सरपंच ने मजदूरों की मांगों का किया समर्थन
मामले को लेकर ग्राम पंचायत सेरेनगदाग के सरपंच अजित नगेसिया ने भी मजदूरों की मांगों का समर्थन किया हैं। उन्होंने कहा,कि कंपनी की ओर से शुरुआत में शिक्षा, अस्पताल, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं को लेकर कई वादे किए गए थे। सरपंच के मुताबिक वर्तमान स्थिति में मजदूरों को रोजगार से हटाए जाने की जानकारी सामने आई हैं। उन्होंने कहा, कि मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मामला उठाया जाएगा।
🟠कंपनी प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, मजदूरों और ग्रामीणों के आरोपों पर बालाजी मार्बल एवं टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के जनरल मैनेजर आलोक चतुर्वेदी ने सफाई दी हैं। उनका कहना हैं,कि किसी भी मजदूर को सीधे तौर पर काम से नहीं निकाला गया हैं,बल्कि माइंस का काम व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किया गया हैं।जीएम ने सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराने और अवैध डंपिंग के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा,कि कंपनी में करीब 200 से 250 मजदूर पहले से काम कर रहे हैं,और सुरक्षा व्यवस्था के तहत हेलमेट एवं सुरक्षा जूते पहनकर आने वाले श्रमिकों को ही प्रवेश दिया जा रहा हैं। उन्होंने अन्य व्यवस्थाओं को भी जल्द दुरुस्त करने की बात कही हैं।
🟠प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल मामले में मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के दावों में अंतर सामने आ रहा हैं। ऐसे में अब पूरे मामले में जिला प्रशासन और संबंधित खनन विभाग की भूमिका अहम होगी। मजदूरों द्वारा लगाए गए रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था, जमीन के लिए दबाव और डंपिंग संबंधी आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।












