मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का एक वर्ष : 850 गांवों में पहली बार पहुंची नियमित बस सेवा

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,4अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए,नियमित यात्री परिवहन की सुविधा अब धीरे-धीरे बड़ी जरूरत से बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने संचालन का एक वर्ष पूरा कर लिया हैं। 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत वर्तमान में बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं।योजना के जरिए अब तक 850 ऐसे गांवों को नियमित बस सेवा से जोड़ा गया हैं, जहां पहले यात्री बस की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। एक वर्ष में इन बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की हैं। वर्तमान में बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर हैं।

🟠34 बसों से शुरू हुई योजना,अब 107 बसों तक पहुंची

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में हुई थी। शुरुआती चरण में 34 मार्गों पर बस सेवा शुरू की गई थी और करीब 250 गांवों को इससे जोड़ा गया था। एक साल में योजना का दायरा तेजी से बढ़ा और अब 106 मार्गों पर 107 बसें ग्रामीणों को परिवहन सुविधा दे रही हैं।पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया हैं। बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें और सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें चल रही हैं।

🟠13 जिलों के गांवों तक पहुंची बस सेवा

बस्तर संभाग में सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जिले शामिल हैं। वहीं सरगुजा संभाग में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में बसों का संचालन किया जा रहा हैं।इनमें सुकमा में 8 मार्गों पर 9 बसें, दंतेवाड़ा में 7 मार्गों पर 7, बीजापुर में 11 मार्गों पर 11, नारायणपुर में 4 मार्गों पर 4, बस्तर में 5 मार्गों पर 5, कांकेर में 12 मार्गों पर 12 और कोंडागांव में 8 मार्गों पर 9 बसें चल रही हैं।सरगुजा में 8 मार्गों पर 8 बसें, सूरजपुर में 10 मार्गों पर 9, बलरामपुर में 7 मार्गों पर 7, जशपुर में 16 मार्गों पर 16, कोरिया में 6 मार्गों पर 6 तथा MCB जिले में 4 मार्गों पर 4 बसों का संचालन हो रहा हैं।

🟠जहां पिकअप और मालवाहक वाहन थे सहारा, वहां अब नियमित बस

बस्तर और सरगुजा के कई दुर्गम गांवों में पहले नियमित बस सेवा नहीं होने के कारण,ग्रामीणों को पिकअप और दूसरे मालवाहक वाहनों से सफर करना पड़ता था। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए लंबी दूरी का ऐसा सफर कई बार मुश्किल भरा होता था।कम यात्री संख्या और दुर्गम सड़कों के कारण निजी बस संचालकों के लिए भी इन मार्गों पर नियमित बस चलाना व्यावसायिक रूप से आसान नहीं था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता के जरिए ऐसे मार्गों पर बस संचालन को व्यवहारिक बनाने की व्यवस्था की।

🟠कोंटा-जगरगुंडा मार्ग पर बदली तस्वीर

योजना का असर सुकमा के कोंटा-जगरगुंडा मार्ग पर भी देखने को मिला हैं। करीब 83 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पहले ग्रामीणों के पास परिवहन के सीमित विकल्प थे। बस सेवा शुरू होने के बाद स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, महिलाओं और काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को नियमित परिवहन का विकल्प मिला है।ग्रामीण इस बस के जरिए आम, महुआ, मुर्गी और अन्य वनोपज हाट-बाजार तक ले जा पा रहे हैं। इससे कई लोगों के लिए एक ही दिन में बाजार जाकर वापस गांव लौटना संभव हुआ हैं।

🟠बस के साथ गांव तक पहुंच रहा बाजार

योजना का फायदा केवल यात्रियों के आने-जाने तक सीमित नहीं हैं। नियमित बस सेवा ने गांवों और हाट-बाजारों के बीच संपर्क बढ़ाया हैं। ग्रामीण अपने उत्पाद और वनोपज बाजार तक पहुंचा रहे हैं,और जरूरत का सामान गांव तक ला पा रहे हैं।इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक कामों के लिए विकासखंड और जिला मुख्यालय तक पहुंच भी आसान हुई हैं।

🟠तीन साल तक वित्तीय सहायता का प्रावधान

दुर्गम और कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर बस संचालन को जारी रखने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को, प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही हैं। पहले वर्ष में 26 रुपये प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान हैं।योजना के तहत संचालकों को अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट भी दी जाती हैं। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी हैं।इस मॉडल में बस का स्वामित्व और संचालन निजी संचालक के पास रहता हैं। सरकार उन मार्गों पर आर्थिक सहायता देती हैं,जहां सामान्य परिस्थितियों में नियमित बस सेवा चलाना मुश्किल होता हैं।

🟠GPS से बसों की निगरानी

योजना में बसों के संचालन की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। प्रत्येक बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाया गया हैं। इससे परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जाती हैं।MMGBY पोर्टल पर बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी उपलब्ध रहती हैं। संचालकों को वित्तीय सहायता भी वास्तव में तय मार्ग पर चले किलोमीटर के आधार पर VLTD रिपोर्ट के अनुसार दी जाती हैं।यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

🟠दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी

पहले चरण की प्रगति के बाद योजना को दूसरे चरण में और विस्तार देने की तैयारी हैं। दूसरे चरण में आठ नए जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों के 85 आदिवासी विकासखंडों को योजना से जोड़ने का प्रस्ताव हैं।इसमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी शामिल हैं।इन क्षेत्रों के 4,368 बस सुविधा विहीन गांवों को जोड़ने का लक्ष्य हैं। इससे लगभग 14.57 लाख लोगों को परिवहन सुविधा मिलने की संभावना हैं। दूसरे चरण में 60 से 80 बसों के संचालन का प्रस्ताव हैं। यात्रियों के लिए UPI और QR कोड से किराया भुगतान की सुविधा भी प्रस्तावित हैं।

🟠विशेष वर्गों को किराए में छूट

योजना में कुछ विशेष वर्गों के लिए किराए में छूट का भी प्रावधान किया गया हैं। दृष्टिबाधित, बौद्धिक दिव्यांग, दोनों पैरों से चलने में असमर्थ व्यक्ति,80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक तथा HIV/AIDS से पीड़ित व्यक्तियों को सहायक सहित किराए में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान हैं।वहीं कलेक्टर द्वारा प्रमाणित नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को किराए में 50 प्रतिशत छूट दी जाती हैं।

🟠अंतिम छोर तक परिवहन पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरे होने पर कहा,कि दूरस्थ गांवों में रहने वाले नागरिकों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, कि सरकार का लक्ष्य परिवहन सुविधा को केवल शहरों और प्रमुख मार्गों तक सीमित रखने के बजाय अंतिम छोर तक बसे गांवों से जोड़ना हैं।मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का विस्तार इसी दिशा में एक प्रयास हैं। आने वाले चरणों में और अधिक बस सुविधा विहीन गांवों को नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने की तैयारी हैं,ताकि दूरी ग्रामीणों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के अवसरों तक पहुंच में बाधा न बने।

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