डेनियल सेप्टी,बस्तर,छत्तीसगढ़,4अक्टूबर2026
बस्तर में नक्सल हिंसा के दौरान आईईडी विस्फोटों की चपेट में आकर हाथ-पैर गंवाने वाले लोगों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष पहल की हैं। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा हैं,कि सरकार का प्रयास हैं,कि आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए,लोगों के जीवन की मुश्किलें कम हों और उन्हें जरूरत के मुताबिक कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।इसी उद्देश्य से बस्तर संभाग में दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। पहला शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को जगदलपुर में तथा दूसरा 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित होगा।
🟠जगदलपुर में चार जिलों के दिव्यांगजन होंगे शामिल
जगदलपुर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय शिविर में बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले के दिव्यांगजन शामिल होंगे।विभागीय जानकारी के अनुसार इस शिविर के लिए चारों जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजनों को चिन्हांकित किया गया हैं।
🔸️बस्तर — 1,570
🔸️कोण्डागांव — 1,080
🔸️कांकेर — 236
🔸️नारायणपुर — 67
इन हितग्राहियों को उनकी जरूरत के अनुसार चिकित्सा परीक्षण और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी की गई हैं।
🟠दंतेवाड़ा शिविर में तीन जिलों को मिलेगा लाभ
दूसरा तीन दिवसीय शिविर 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के दिव्यांगजन शामिल होंगे।दोनों शिविरों के माध्यम से बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
🟠आईईडी पीड़ितों को विशेष प्राथमिकता
इन शिविरों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आईईडी विस्फोटों में दिव्यांग हुए,नागरिकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। विस्फोट में हाथ या पैर गंवाने वाले लोगों की विशेषज्ञों द्वारा जांच और आवश्यक माप लेकर उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।जरूरत के अनुसार जयपुर फुट, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स सहित अन्य सहायक उपकरण दिए जाएंगे। पुराने या क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखे जाने की जानकारी दी गई हैं।
🟠केवल आईईडी पीड़ित ही नहीं,अन्य दिव्यांग भी ले सकेंगे लाभ
शिविर का लाभ केवल आईईडी विस्फोट पीड़ितों तक सीमित नहीं रहेगा। अन्य कारणों से दिव्यांग हुए, जरूरतमंद लोग भी यहां स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सहायक उपकरण के लिए पहुंच सकेंगे।समाज कल्याण विभाग के सहयोग से श्रवण यंत्र, बैसाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, सामान्य छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और कैलिपर्स सहित विभिन्न उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उपयोगी उपकरण भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी।
🟠जयपुर की विशेषज्ञ संस्था देगी तकनीकी सहयोग
शिविर में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। विशेषज्ञों द्वारा हितग्राहियों की जरूरत का आकलन कर आवश्यक माप लिए जाएंगे, ताकि उनके लिए उपयुक्त कृत्रिम अंग तैयार किए जा सकें।इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं,बल्कि दिव्यांगजनों को रोजमर्रा के कामों में अधिक सुविधा देने और उनके जीवन को आसान बनाने में मदद करना हैं।
🟠ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था
शिविर में लाभ लेने के लिए हितग्राहियों के पंजीयन की व्यवस्था ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक की गई हैं। जरूरतमंद व्यक्ति अपने जिले के कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी या जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।ग्राम सभाओं के माध्यम से भी ऐसे हितग्राहियों की जानकारी एकत्र कर ग्राम पंचायत सचिव के जरिए जनपद पंचायत और जिला पंचायत तक पहुंचाई जाएगी।
🟠पहले पंजीयन नहीं हुआ तो भी शिविर में पहुंच सकते हैं
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया हैं,कि यदि किसी कारणवश किसी जरूरतमंद व्यक्ति का पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हैं,तो वह सीधे शिविर में भी पहुंच सकता हैं। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी।
🟠सरकार का फोकस आईईडी प्रभावित परिवारों तक पहुंचे सहायता
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा,कि आईईडी विस्फोट किसी व्यक्ति की पहचान नहीं करता था। इसकी चपेट में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ आम नागरिक और पशु भी आए। कई नागरिकों ने इन घटनाओं में अपने हाथ-पैर गंवाए और इसके बाद उन्हें लंबे समय तक दिव्यांगता के साथ जीवन बिताना पड़ा।उन्होंने कहा,कि सरकार का प्रयास हैं,कि ऐसे लोगों तक पहुंचकर उनकी वास्तविक जरूरत को समझा जाए और उसी के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाए।
🟠बस्तर को आईईडी के दंश से बाहर निकालने पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने कहा,कि सरकार का प्रयास केवल बस्तर को आईईडी के भय से मुक्त करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन लोगों तक भी सहायता पहुंचाना है जो पहले हुए विस्फोटों से प्रभावित हुए हैं।दोनों शिविरों के जरिए बस्तर संभाग के अधिक से अधिक आईईडी पीड़ितों और अन्य दिव्यांगजनों तक सहायता पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया हैं। सरकार का उद्देश्य वर्षों से दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहे लोगों की कठिनाइयों को कम करना और उन्हें जरूरत के मुताबिक सहायक साधन उपलब्ध कराना हैं।












