शारदीय नवरात्रि 2026 : आदिशक्ति की आराधना में लीन हुआ छत्तीसगढ़,Nexis News परिवार की ओर से सभी पाठकों को महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,11अक्टूबर2026

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही, सनातन संस्कृति के सबसे पावन पर्वों में से एक ‘शारदीय नवरात्रि’ का शुभारंभ हो चुका हैं। माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और तंत्र-मंत्र व शक्ति साधना के, ऐतिहासिक केंद्र छत्तीसगढ़ में यह महापर्व आध्यात्मिक गरिमा, वैदिक अनुष्ठान और समृद्ध लोक संस्कृति के अद्भुत समन्वय के रूप में मनाया जा रहा हैं।शुभ मुहूर्त में प्रदेश के ऐतिहासिक शक्तिपीठों, ग्राम्य देवी थानों, पूजा-पंडालों और घर-घर में विधिवत घटस्थापना (कलश स्थापना) संपन्न हुई। इसके साथ ही नौ दिवसीय शक्ति आराधना का अनुष्ठान आरंभ हो गया हैं। पहले दिन जगतजननी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने आरोग्यता, आत्मबल और लोक-कल्याण की कामना की।

🟠शारदीय नवरात्रि का दार्शनिक, खगोलीय व वैज्ञानिक महत्व

🔸️सनातन पंचांग के अनुसार वर्ष भर में चार नवरात्रि आती हैं, दो गुप्त (माघ और आषाढ़) तथा दो प्रत्यक्ष (चैत्र और शारदीय)। इनमें शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व हैं।

🔸️ऋतु-संधिकाल और जैविक शोधन : खगोलीय दृष्टि से यह समय वर्षा ऋतु की विदाई और शरद ऋतु के आगमन का संधिकाल होता हैं। तापमान और वातावरण में बदलाव के कारण मानव शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन प्रभावित होता हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इन नौ दिनों का उपवास, सात्विक फलाहार और संयमित दिनचर्या शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सीफाई कर आने वाले शीत मौसम के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाती हैं।

🔸️श्रीराम की ‘अकाल बोधन’ परंपरा : त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका विजय और रावण पर, विजय प्राप्त करने से पूर्व आश्विन मास में समुद्र तट पर नौ दिनों तक आदिशक्ति चंडी की उपासना कर उन्हें असमय जागृत किया था, जिसे धर्मग्रंथों में ‘अकाल बोधन’ कहा गया हैं। यह अनुष्ठान असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का सनातन प्रतीक बना।

🔸️महिषासुरमर्दिनी का संदेश: देवी भागवत और श्री दुर्गा सप्तशती के अनुसार,नौ दिनों के भीषण संग्राम के बाद मां भगवती ने महिषासुर का वध कर सृष्टि को अभय दान दिया था। यह पर्व आसुरी प्रवृत्तियों पर दैवीय शक्ति और सत्य की विजय का पर्व हैं।मातृ चेतना व नारी शक्ति का जागरण: नवरात्रि का दार्शनिक आधार सृष्टि के संचालन में नारी शक्ति (आदिशक्ति) की महत्ता को स्वीकार करना हैं। यह पर्व समाज में मातृशक्ति के सम्मान और संरक्षण का संदेश देता हैं।

🟠शक्तिपीठों में आस्था का ज्वार: जहां जलते हैं लाखों ‘मनोकामना ज्योति कलश’

🔸️छत्तीसगढ़ की नवरात्रि परंपरा देश भर में विशिष्ट हैं। यहां की प्रमुख पहचान ‘मनोकामना ज्योति कलश’ की स्थापना हैं,जहां श्रद्धालु मिट्टी या पीतल के कलश में शुद्ध देशी घी अथवा तिल का तेल अर्पित कर संकल्प लेते हैं।

🔸️ये दीप पूरे नौ दिनों तक अखंड रूप से प्रज्ज्वलित रहते हैं:मां बम्लेश्वरी धाम (डोंगरगढ़ – राजनांदगांव): समुद्र तल से लगभग 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित बड़ी बम्लेश्वरी और तलहटी में स्थित छोटी बम्लेश्वरी मंदिर में, आस्था का सैलाब उमड़ा हैं। कामकंदला और माधवनल की ऐतिहासिक लोकगाथा से जुड़े इस धाम में हजारों की संख्या में आजीवन, घृत और तैल ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं। रायपुर, भिलाई-दुर्ग, राजनांदगांव सहित सीमावर्ती राज्यों महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश से पदयात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

🔸️मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ (दंतेवाड़ा – बस्तर) : शंखिनी और डंकिनी नदियों के पवित्र संगम पर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्रि का उल्लास ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के साथ जुड़कर भव्य रूप लेता हैं। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ-साथ पारंपरिक बस्तरिया वाद्ययंत्रों (तोरही, मोहरी और ढोल) की थाप पर बस्तर की पारंपरिक लोक-रीति से देवी की आराधना की जा रही हैं।

🔸️मां महामाया मंदिर (रतनपुर – बिलासपुर) : कलचुरी कालीन ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में राजा रत्नदेव द्वारा 11वीं शताब्दी में स्थापित महामाया मंदिर में तांत्रिक और वैदिक दोनों पद्धतियों से घटस्थापना हुई। यहां के विशाल ज्योति कक्षों में जगमगाती दीपों की कतारें वास्तुकला और अटूट आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

🔸️रामानुजगंज के सिद्ध शक्ति स्थल (बलरामपुर जिला): उत्तर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कन्हर नदी के तटवर्ती अंचल में स्थित मां महामाया मंदिर और प्राकृतिक सुरम्यता के बीच स्थित पहाड़ी माता मंदिर में नवरात्रि का विशेष उल्लास देखने को मिल रहा हैं।

🔸️मां महामाया मंदिर (रामानुजगंज): सरगुजा रियासत कालीन मान्यताओं से जुड़े इस पावन धाम में तड़के से ही घटस्थापना के साथ स्थानीय व अंतरराज्यीय श्रद्धालुओं द्वारा सैकड़ों मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं।

🔸️पहाड़ी माता मंदिर (रामानुजगंज): प्राकृतिक पहाड़ी पर विराजमान मां पहाड़ी माता के दरबार में सीढ़ियां चढ़कर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी हुई हैं। मनोकामना पूर्ति के लिए यहां स्थापित अखंड ज्योति कलशों के दर्शन हेतु छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

🔸️मां चंद्रहासिनी व नाथलदाई (चंद्रपुर – सक्ती): महानदी, मांड और लात नदी के संगम तट पर स्थित सिद्धपीठ चंद्रपुर में जल अभिषेक और भव्य शृंगार के साथ पट खुले, जहां सड़क और जलमार्ग दोनों से भक्तों का तांता लगा हुआ हैं।

🔸️मां सर्वमंगला (कोरबा) व मां महामाया (अंबिकापुर): सरगुजा संभाग के ऐतिहासिक महामाया मंदिर और ऊर्जाधानी कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में भी हजारों ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं।राजधानी रायपुर के सिद्ध धाम: पुरानी बस्ती स्थित ऐतिहासिक महामाया मंदिर, कंकाली तालाब स्थित कंकाली माता मंदिर, आकाशवाणी चौक का काली माता मंदिर और बंजारी धाम में तड़के से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

🟠लोक संस्कृति का पर्व: जसगीत, जंवारा और पदयात्री सेवा

छत्तीसगढ़ में नवरात्रि केवल मंदिरों तक सीमित न रहकर सीधे लोक-जीवन से जुड़ती हैं।’जसगीत’ और ‘सेवा’ मंडलियां: नवरात्र की रातों में गांव-गांव और मोहल्लों में ‘सेवा जस’ मंडलियां सक्रिय हो गई हैं। मांदर, मंजीरा और झांझ की थाप पर छत्तीसगढ़ी बोली में गाए जाने वाले देवी जसगीत—”झूलत हे मैया के झुलना…” और “अंगना म तोर महुवा गड़े हे…”—वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं।’जंवारा’ बोने की समृद्ध परंपरा: कलश स्थापना के साथ ही मंदिरों और घरों में पवित्र मिट्टी में गेहूं अथवा जौ के दाने बोकर ‘जंवारा’ स्थापित किया गया हैं। हरे-भरे उगने वाले ये अंकुर प्रकृति की उर्वरता, कृषि समृद्धि और अन्नापूर्णा स्वरूप का प्रतीक माने जाते हैं, जिनका विसर्जन महानवमी और विजयादशमी को शोभायात्रा के साथ होता हैं।

🔸️पदयात्रियों के लिए सेवा भाव : रायपुर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-53) सहित डोंगरगढ़ जाने वाले प्रमुख मार्गों पर सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों ने पदयात्रियों के लिए सेवा शिविर लगाए हैं, जहां फलाहारी भोजन, चाय-पानी, प्राथमिक चिकित्सा और विश्राम की निःशुल्क व्यवस्था की गई हैं।गरबा और सांस्कृतिक संध्याएं: शहरों के विभिन्न पंडालों और सोसायटियों में पारंपरिक गरबा, डांडिया और सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन शुरू हो चुका हैं,जहां युवा पीढ़ी पारंपरिक परिधानों में उत्सव मना रही हैं।

🟠सुरक्षा, यातायात और प्रशासनिक तैयारियां

श्रद्धालुओं की भारी संख्या और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं।

🔸️डोंगरगढ़ व शक्तिपीठों में सुरक्षा: डोंगरगढ़ मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटकर पुलिस बल, महिला सुरक्षा बल और होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं। पहाड़ी मार्ग और संवेदनशील बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से लगातार निगरानी रखी जा रही हैं।

🔸️रेलवे का विशेष सहयोग: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा डोंगरगढ़ स्टेशन पर दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए कई लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव (स्टॉपेज) दिया गया हैं। और मेला स्पेशल लोकल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए गए हैं।

🔸️स्वास्थ्य व आपात सेवाएं: प्रमुख पदयात्रा मार्गों पर सचल स्वास्थ्य टीमें (Mobile Medical Units), एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार केंद्र सक्रिय रखे गए हैं।

🟠Nexis News परिवार की ओर से मंगलकामनाएं

त्याग, तपस्या, आत्म-अनुशासन और शक्ति के जागरण के इस पावन महापर्व पर Nexis News परिवार अपने, समस्त सुधी पाठकों, दर्शकों, विज्ञापनदाताओं और समस्त छत्तीसगढ़वासियों को शारदीय नवरात्रि की कोटि-कोटि शुभकामनाएं प्रेषित करता हैं।मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया, पहाड़ी माता और छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा से हमारे प्रदेश में खुशहाली,अमन-चैन और समृद्धि का वास हो। हमारे अन्नदाता किसानों की मेहनत फलीभूत हो, व्यापार और आजीविका में उन्नति आए तथा समाज में नारी शक्ति के प्रति आदर, सुरक्षा और समानता की भावना और अधिक सशक्त हो।

जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, जय माता दी!

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