संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,6अगस्त2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में,छत्तीसगढ़ ने समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं, उभयलिंगी व्यक्तियों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू कर सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी हैं।
🟠21.73 लाख से अधिक हितग्राहियों को पेंशन का लाभ
राज्य की विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 21.73 लाख से अधिक लोगों को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही हैं। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 7.56 लाख हो गई ह्। लगभग 96 प्रतिशत हितग्राहियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे भुगतान किया जा रहा हैं,जबकि ई-केवाईसी और आधार सीडिंग से व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी हैं।
🟠दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर विशेष जोर
राज्य में यूडीआईडी (UDID) धारकों की संख्या 2.44 लाख से बढ़कर 2.77 लाख हो गई हैं। कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के लाभार्थियों की संख्या 1,161 से बढ़कर 17,038 तक पहुंच गई हैं। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का दायरा भी बढ़ाया गया हैं।
🟠वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत सहायता तंत्र
राज्य सरकार ने वृद्धाश्रमों और देखरेख संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के साथ सियान हेल्पलाइन (155326) को प्रभावी बनाया हैं। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉलों की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख तक पहुंच गई है, जो बुजुर्गों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती हैं।
🟠नशामुक्ति अभियान से हजारों लोगों को नई जिंदगी
भारत माता वाहिनी योजना के तहत संचालित नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़कर 29 हो गई हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 5,220 से अधिक लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा मिली हैं।
🟠“सुगम्य छत्तीसगढ़” अभियान से बढ़ी पहुंच
राज्य सरकार ने “सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान” शुरू कर सार्वजनिक भवनों, सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य तेज किया हैं। साथ ही दिव्यांगजनों के अधिकारों की निगरानी के लिए आयुक्त राज्य के नए पद को भी स्वीकृति दी गई हैं।
🟠समाज कल्याण बजट में बढ़ोतरी
समाज कल्याण विभाग का बजट 2023-24 में 1,512 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2025-26 में 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया हैं। सरकार का मानना हैं,कि सामाजिक कल्याण खर्च नहीं, बल्कि मानव संसाधन और सामाजिक विकास में निवेश हैं।
🟠डिजिटल प्रशासन बना सुशासन की पहचान
डीबीटी, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी, डिजिटल डेटा प्रबंधन और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाया हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना हैं।












