संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़/11नवंबर2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर,आयोजित भारत पर्व में इस बार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, स्वाद और सृजनशीलता की झलक ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया हैं।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भारत पर्व में भाग लिया और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा लगाए गए आकर्षक स्टॉल का अवलोकन किया।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, योजनाओं और सांस्कृतिक पहलों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि –
“छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, परंपराएं और लोककला पूरे भारत में अपनी अनोखी पहचान रखती हैं। राज्य अब तेजी से भारत के उभरते हुए पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा हैं।”
🟠छत्तीसगढ़िया व्यंजनों ने खींचा आगंतुकों का ध्यान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के स्टूडियो किचन में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, रायपुर की छात्राओं द्वारा तैयार पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।अमारी का शरबत, करील के कबाब, चौसेला रोटी, बफौरी और फरा जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पाक-परंपरा को जीवंत कर दिया।
🟠मुख्यमंत्री ने छात्राओं की प्रशंसा करते हुए कहा
“ये छात्राएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर की संवाहक हैं, जो अपनी प्रतिभा से राज्य का गौरव बढ़ा रही हैं।”इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य और जीएम वेदव्रत सिरमौर भी उपस्थित थे।
🟠हस्तकला और लोकसंस्कृति पर गर्व
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर के बुनकरों द्वारा तैयार कोसा वस्त्रों की खरीदारी की और छत्तीसगढ़ी शिल्पियों से संवाद किया।उन्होंने भारत पर्व में प्रस्तुति देने आए छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि –
“छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, वेशभूषा और लोकनृत्य हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। हमारा उद्देश्य हैं,कि इन परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर और सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जाए।”
🟠भारत पर्व में छत्तीसगढ़ बना आकर्षण का केंद्र
भारत पर्व में बड़ी संख्या में आगंतुक छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और पर्यटन स्थलों की झलक देखने पहुंचे।राज्य की सजीव संस्कृति, संगीत और लोककला ने सभी को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित किया।












