संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,17जनवरी2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दौरान आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए,शहर में निःशुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना हैं,कि परिवहन की असुविधा के कारण कोई भी व्यक्ति इस महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजन में शामिल होने से वंचित न रह जाए।
यह निःशुल्क बस सेवा 23, 24 और 25 जनवरी 2026—तीन दिनों तक लगातार संचालित की जाएगी। इन तीनों दिनों में बसों का संचालन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा,जिससे नागरिक बिना किसी अतिरिक्त खर्च के रायपुर साहित्य उत्सव स्थल तक आसानी से पहुंच सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार,इस विशेष सेवा के अंतर्गत लगभग 15 बसें चलाई जाएंगी। ये बसें उत्सव स्थल तक आने और लौटने—दोनों दिशाओं में संचालित होंगी,ताकि कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बसों की संख्या इस तरह निर्धारित की गई है कि भीड़ के समय भी सुचारु और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
शहर के अधिकतम क्षेत्रों को जोड़ने के लिए कुल 6 प्रमुख रूट तय किए गए हैं। इन रूट्स के माध्यम से रायपुर के विभिन्न हिस्सों से लोगों को पुराने रायपुर क्षेत्र से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर स्थित रायपुर साहित्य उत्सव स्थल तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी।
निःशुल्क बस सेवा के अंतर्गत संचालित सभी बसों पर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की विशेष ब्रांडिंग की जाएगी। इससे न केवल पूरे शहर में साहित्य उत्सव का माहौल बनेगा, बल्कि नागरिकों में आयोजन को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी और उत्सव की पहचान व्यापक स्तर पर स्थापित होगी।
बसों की विस्तृत समय-सारणी शीघ्र जारी की जाएगी, जिसे विभिन्न माध्यमों से सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बस सेवा समयबद्ध, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो।
उल्लेखनीय हैं,कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026, छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। निःशुल्क बस सेवा की यह व्यवस्था अधिकाधिक नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई हैं, जिससे यह आयोजन एक व्यापक जन-सांस्कृतिक उत्सव के रूप में उभर सके।












