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जिला सहकारी बैंक में बड़े घोटाले की आहट! किसानों के नाम पर फर्जी लोन और धान की राशि में डाका, उच्च स्तरीय जांच की मांग

विशेष पड़ताल: नेक्सिस न्यूज़ ब्यूरो/बलरामपुर।06जून2026—Nexis News

सहकारी व्यवस्था के जरिए किसानों को संबल देने का दावा करने वाले सिस्टम पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर की रामानुजगंज शाखा से एक ऐसा मामला सामने आया हैं, जिसने सहकारिता विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया हैं। किसानों के नाम पर कथित रूप से फर्जी लोन तैयार करने और धान बेचने के बाद मिलने वाली राशि से लाखों रुपये की अवैध कटौती का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अरविंद दुबे ने मोर्चा खोल दिया हैं। उन्होंने सीधे तौर पर इसे एक संगठित और बड़ा वित्तीय घोटाला बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की हैं।

🟠पार्टी बदली, साल बदला, पर नहीं बदला किसानों का दर्द

दरअसल, यह पूरा मामला पिछले साल धान खरीदी के दौरान तब उजागर हुआ, जब अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई लेने बैंक पहुंचे किसानों के खातों से बकाया कर्ज के नाम पर मनमाने तरीके से पैसे काटने शुरू कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह हैं,कि लिस्ट में ऐसे दर्जनों किसानों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी बैंक से लोन के लिए आवेदन तक नहीं किया और न ही कभी एक रुपया कर्ज लिया।

🟠लोन का खेल: बिना अर्जी, बिना मर्जी… सीधे कर्जदार!

नियम के मुताबिक, जिला सहकारी बैंक सीधे लोन नहीं बांटता। यह प्रक्रिया आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के जरिए होती हैं, जो किसानों की जमीन के रकबे और पात्रता के हिसाब से फाइल बैंक को भेजती हैं। लेकिन यहां तो खेल ही निराला हैं; किसानों को पता ही नहीं और उनके नाम पर लाखों का कर्ज चढ़ गया।

🟠समिति दे रही क्लीन चिट, पर बैंक अड़ा अपनी जिद पर!

इस मामले में सबसे बड़ा पेंच तब फंसा जब पीड़ित किसानों ने अपनी संबंधित सहकारी समितियों से संपर्क किया। समितियों ने बाकायदा लिखित में प्रमाणपत्र दे दिया,कि “इस किसान पर समिति का कोई बकाया नहीं हैं और न ही इन्हें कोई लोन दिया गया हैं।”

हैरानी की बात यह हैं,कि जिला सहकारी बैंक के अधिकारी इन लिखित प्रमाणपत्रों को भी रद्दी का टुकड़ा मानकर खारिज कर रहे हैं और जबरन किसानों के धान की राशि से कटौती की जा रही हैं।

🟠प्रशासनिक उदासीनता: ‘सुशासन तिहार’ में भी नहीं मिली राहत

कांग्रेस नेता अरविंद दुबे ने आरोप लगाया,कि पीड़ित किसानों ने न्याय के लिए अंबिकापुर बैंक के चक्कर काटे, महाप्रबंधक से गुहार लगाई और कलेक्टर को भी शिकायती पत्र सौंपे, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। हद तो तब हो गई जब हाल ही में आयोजित हुए ‘सुशासन तिहार’ में भी इन पीड़ित अन्नदाताओं की सुध नहीं ली गई। कई जगह तो अधिकारियों ने इनके आवेदन तक लेने से साफ मना कर दिया, जिससे किसानों में भारी आक्रोश हैं।

🟠पात्रता से अधिक का लोन, बड़े रैकेट की आशंका

अरविंद दुबे ने तकनीकी पहलू उठाते हुए कहा,कि किसी भी किसान को उसकी जमीन के सीमित रकबे के आधार पर ही लोन मिल सकता हैं। लेकिन कागजों पर कई किसानों के नाम पर उनकी पात्रता से कहीं अधिक की राशि दर्ज हैं। यह इस बात का साफ संकेत हैं,कि बैंक और कुछ रसूखदारों की मिलीभगत से एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा हैं,जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी पैसे का गबन कर रहा हैं।

🟠आर-पार की लड़ाई के मूड में कांग्रेस

नेक्सिस न्यूज़ से बात करते हुए,अरविंद दुबे ने दो टूक शब्दों में कहा:

“यह सीधे-सीधे गरीब किसानों के हक पर डाका हैं। राज्य शासन और सहकारिता विभाग को तुरंत एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनानी चाहिए। अगर निष्पक्ष जांच हुई, तो जिला सहकारी बैंक के भीतर चल रहे एक बहुत बड़े घोटाले की परतें खुलेंगी और कई सफेदपोश बेनकाब होंगे। कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी, हम किसानों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेंगे।”

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