संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,9जून2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और आधुनिक रचनात्मकता का अद्भुत संगम बने, संस्कृति विभाग के बहुप्रतीक्षित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतिभागियों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ भव्य समापन हुआ। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में आयोजित 16 दिवसीय शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन समारोह में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, प्रशिक्षु और अभिभावक उपस्थित रहे।
🟠नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना समय की आवश्यकता – बृजमोहन अग्रवाल
अपने संबोधन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, कि वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए,उन्होंने ‘आकार’ प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित करना तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना था।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत हैं। बच्चों को मिट्टी, प्रकृति और पारंपरिक कलाओं से जोड़ने से उनमें संवेदनशीलता और सृजनशीलता का विकास होता हैं।
🟠लोक कला और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम
‘आकार-2026’ में प्रतिभागियों को टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, भरथरी गायन, कथक, लोकनृत्य, हस्तकला जैसी पारंपरिक विधाओं के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कला की आधुनिक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया।संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने बताया,कि अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क 200 रुपये से घटाकर 100 रुपये किया गया था। साथ ही दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को विशेष रियायतें भी प्रदान की गईं।
🟠लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हुई सांस्कृतिक संध्या
समापन समारोह में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतिभागियों ने सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन और लोक संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि बृजमोहन अग्रवाल ने सभी कला गुरुओं और प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
🟠कला गुरुओं ने दिया प्रशिक्षण
शिविर में एआई आर्ट, पेंटिंग, कथक, लोकसंगीत, टेराकोटा, बोनसाई, जूट शिल्प, गोदना कला, हस्तकढ़ाई, वुडन ट्राइबल आर्ट, लिप्पन आर्ट, क्रोशिया कला सहित 16 विधाओं में प्रदेश के प्रतिष्ठित कला गुरुओं ने प्रशिक्षण दिया।‘आकार-2026’ ने एक बार फिर साबित कर दिया,कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी हैं। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सफल प्रयास बनकर उभरा।












