संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,24जून2026
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में, वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की जा रही हैं। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन ने विशेष रूप से,कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के गांव ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया हैं। इस पहल से दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
🟠चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की संख्या
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई हैं। वन विभाग द्वारा चलाए गए एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहलों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला हैं।
🟠संरक्षण और आजीविका का अनूठा मॉडल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में रिजर्व क्षेत्र में,संरक्षण आधारित विकास मॉडल पर कार्य किया जा रहा हैं। इसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई हैं,जिससे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को लाभ मिल रहा हैं।
🟠हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम की अहम भूमिका
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम, लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और उनके प्राकृतिक आवासों की निगरानी कर रही हैं। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान का हिस्सा हैं। इनके प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा क्षेत्र हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्पॉट के रूप में विकसित हुए हैं।
🟠प्रकृति प्रेमियों के लिए नया आकर्षण
प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में दुर्लभ हॉर्नबिल पक्षियों का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई हैं।
🟠स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी हैं। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग एवं नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं। प्रशिक्षण के बाद वे पर्यटकों के लिए हॉर्नबिल गाइड और नेचर गाइड के रूप में कार्य करेंगे, जिससे उन्हें स्थायी आय का स्रोत मिलेगा और सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
🟠मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में पहचान बना रहा हैं। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट और मिनिवेट जैसे दुर्लभ पक्षी भी देखे जा सकते हैं।
🟠जैव विविधता का समृद्ध केंद्र
यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ इंडियन जायंट स्क्विरल और इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यही वजह हैं,कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा हैं।विशेषज्ञों का मानना हैं,कि हॉर्नबिल सफारी संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय विकास के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण साबित होगी। इससे छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।












