डेनियल सेप्टी,बस्तर,छत्तीसगढ़,14जुलाई2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में, नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा,कि दशकों तक नक्सली हिंसा ने बस्तर के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के सहयोग से बस्तर शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका हैं।मुख्यमंत्री ने कहा,कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई गई। इसके परिणामस्वरूप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई और शासन की योजनाएं दूरस्थ गांवों तक पहुंचने लगीं। उन्होंने नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए,सुरक्षा बलों के साहस और समर्पण की सराहना की।मुख्यमंत्री ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए प्रभावी पुनर्वास नीति लागू की गई हैं।
इसके तहत आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की हैं।उन्होंने कहा,कि अब सरकार का पूरा फोकस ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से बस्तर के समग्र विकास पर है। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, हवाई संपर्क, रोजगार, आजीविका और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा हैं। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के जरिए 5,542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों तक 31 शासकीय योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया हैं।मुख्यमंत्री ने बताया,कि बस्तर में 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण, 22 लाख आयुष्मान कार्ड, 17 लाख जनधन खाते, 6.79 लाख राशन कार्ड, 1.18 लाख वनाधिकार पत्र, 3.89 लाख किसान क्रेडिट कार्ड तथा 1.76 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं।
वहीं, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 421 बंद स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है और 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।उन्होंने कहा,कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे, हवाई सेवाओं का विस्तार और सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना जैसे कार्य तेजी से चल रहे हैं। साथ ही बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य भी किया जा रहा हैं।मुख्यमंत्री ने कहा,कि सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का खात्मा करना नहीं, बल्कि बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाना हैं,जहां सुरक्षा, विकास और जनकल्याण के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाया जा सके।












