न्यूज डेस्क,जशपुर,छत्तीसगढ़,19जुलाई2026
नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालयों में,दोषसिद्धि दर बढ़ाने के उद्देश्य से जशपुर में पुलिस,अभियोजन और न्यायपालिका की संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित की गई। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे तथा डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने, अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS-2023) के प्रभावी पालन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और मजबूत अभियोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
🟠बेहतर समन्वय से ही मिलेगा त्वरित और प्रभावी न्याय : जिला एवं सत्र न्यायाधीश
बैठक को संबोधित करते हुए,जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे ने कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों की सफलता पुलिस,अभियोजन और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय पर निर्भर करती हैं। उन्होंने कहा,कि वैज्ञानिक साक्ष्य, मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी ही दोषसिद्धि दर बढ़ाने का सबसे बड़ा आधार हैं। प्रत्येक प्रकरण में समय-सीमा और विधिक प्रक्रियाओं का गंभीरता से पालन किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके।
🟠डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने BNSS-2023 की प्रक्रियाओं पर दिया विस्तृत मार्गदर्शन
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने, अधिकारियों को सत्र ट्रायल, वारंट ट्रायल, समन ट्रायल और संक्षिप्त (Summary) ट्रायल की प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा,कि नए कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं,बल्कि पीड़ितों को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना हैं। उन्होंने विवेचना में डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वैज्ञानिक जांच के अधिकतम उपयोग पर विशेष बल दिया।
🟠दोषमुक्ति प्रकरण, FSL और DNA रिपोर्ट पर विशेष समीक्षा
बैठक में लंबित मामलों, दोषमुक्ति प्रकरणों तथा एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक माह की 7 तारीख तक सभी दोषमुक्ति प्रकरण समीक्षा के लिए उपसंचालक अभियोजन कार्यालय भेजे जाएं। साथ ही जप्ती कार्रवाई की वीडियोग्राफी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपयोग, ट्रायल इन एब्सेंटिया (Trial in Absentia) सहित BNSS के विभिन्न प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।
🟠मजबूत विवेचना और प्रभावी अभियोजन से बढ़ेगी दोषसिद्धि दर
डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा,कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य, समयबद्ध अभियोजन और न्यायपालिका के साथ सतत समन्वय से ही दोषसिद्धि दर में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हैं। उन्होंने सभी विवेचकों और अभियोजन अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण में विधिक प्रावधानों का गंभीरता से पालन करने और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण की दिशा में सक्रियता से कार्य करने का आह्वान किया।











