संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,5अगस्त2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की हैं। संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य लोक कलाकारों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हैं।
🟠इन क्षेत्रों के कलाकार कर सकते हैं आवेदन
योजना के तहत लोक नृत्य, लोक संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीत लेखन, वाद्ययंत्र वादन, शिल्प कला, पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पाक कला (व्यंजन) तथा सौंदर्य कला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन करने के पात्र होंगे।
🟠चयनित कलाकारों को हर वर्ष मिलेगा आर्थिक सहयोग
योजना के अंतर्गत चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष ₹12,000 से ₹24,000 तक की प्रोत्साहन राशि सीधे ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह सहायता राशि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक बार दी जाएगी, जिससे कलाकारों को अपनी कला को आगे बढ़ाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलेगी।
🟠आवेदन के लिए जरूरी शर्तें
योजना का लाभ केवल उन्हीं कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय ₹96,000 से अधिक नहीं हैं। आवेदन के साथ आय प्रमाण-पत्र, बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड, पैन कार्ड की प्रति तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। साथ ही ‘चिन्हारी पोर्टल’ में पंजीयन भी आवश्यक हैं।
🟠31 अगस्त तक भेज सकते हैं आवेदन
इच्छुक कलाकार 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से आवेदन भेज सकते हैं। आवेदन पत्र संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं,अथवा नया रायपुर स्थित कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।आवेदन भेजते समय लिफाफे पर “मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026” स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा और समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
🟠लोक कलाकारों को मिलेगा सम्मान और नई पहचान
राज्य सरकार का मानना हैं,कि लोक कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक संवाहक हैं। यह योजना न केवल कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें अपनी कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर भी देगी। इससे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।












