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बिलो रेट टेंडर पर बवाल : जिला पंचायत सदस्य बिनोद भारद्वाज ने सरकार को घेरा,गुणवत्ता से समझौता बंद करने की मांग

न्यूज डेस्क,सारंगढ़,छत्तीसगढ़,7जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत सदस्य बिनोद भारद्वाज ने प्रदेश सरकार की मौजूदा ‘बिलो रेट’ टेंडर प्रणाली पर सवाल उठाते हुए,मुख्यमंत्री को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन भेजा हैं। उन्होंने मांग की हैं,कि अनुमानित लागत (एसओआर) से 20 से 30 प्रतिशत कम दर पर निर्माण कार्य स्वीकृत करने की व्यवस्था तत्काल समाप्त की जाए,क्योंकि इससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही हैं,और जनता के टैक्स का करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।

🟠’कम कीमत में अच्छा निर्माण संभव नहीं’

बिनोद भारद्वाज ने कहा कि जब विभाग स्वयं एसओआर (Schedule of Rates) के आधार पर, किसी निर्माण कार्य की वास्तविक लागत तय करता हैं, तो उसी कार्य को उससे काफी कम दर पर स्वीकृत करना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता हैं। उनका कहना हैं,कि कम दर पर काम लेने वाले ठेकेदार लागत निकालने के लिए निर्माण सामग्री और गुणवत्ता से समझौता करते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता हैं।

🟠कुछ वर्षों में जर्जर हो रहे निर्माण

उन्होंने आरोप लगाया,कि प्रदेश में कई सड़कें, पुल, भवन और अन्य सरकारी निर्माण कार्य समय से पहले ही क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य टिकाऊ नहीं रह पा रहे हैं। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही हैं,बल्कि जनता को भी बार-बार खराब सड़कों और अधूरी सुविधाओं का सामना करना पड़ रहा हैं।

🟠सरकार के सामने रखे तीन बड़े सवाल

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बिनोद भारद्वाज ने सरकार के सामने तीन महत्वपूर्ण प्रश्न रखे हैं—

🔸️जब विभाग ने एसओआर के आधार पर वास्तविक लागत तय की हैं,तो फिर एल-1 के नाम पर उससे काफी कम दर पर टेंडर स्वीकार करने की आवश्यकता क्यों?

🔸️यदि कम दर के कारण निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होती हैं,तो इससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी?

🔸️जब बिलो रेट का सीधा असर निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ रहा हैं,तो सरकार इस व्यवस्था को समाप्त क्यों नहीं करती?

🟠गुणवत्ता आधारित टेंडर प्रणाली लागू करने की मांग

बिनोद भारद्वाज ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ मुख्य सचिव को भी पत्र की प्रति भेजते हुए मांग की हैं,कि प्रदेश में गुणवत्ता आधारित टेंडर प्रणाली लागू की जाए। उन्होंने कहा,कि सरकार को केवल सबसे कम बोली लगाने वाले ठेकेदार के बजाय गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

🟠प्रदेश में छिड़ी नई बहस

बिलो रेट टेंडर व्यवस्था को लेकर उठाए गए इस मुद्दे के बाद प्रदेश में,सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं,कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती हैं,और क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई नई नीति बनाई जाती हैं।

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