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कलेक्टर पहुंचीं आंगनबाड़ी केंद्र : बच्चों के पोषण,पढ़ाई और व्यवस्थाओं का लिया जायजा

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,29जुलाई 2026

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की, गुणवत्ता और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने ग्राम कोठीखाड़ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों के पोषण, उपस्थिति, शिक्षण गतिविधियों और केंद्र की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया तथा आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।🟠बच्चों से की आत्मीय बातचीत, परखी सीखने की क्षमता

कलेक्टर बच्चों के बीच पहुंचीं और उनसे बेहद आत्मीयता के साथ बातचीत की। उन्होंने फलों और सब्जियों के नाम पूछकर बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता का आकलन किया। इस दौरान पूर्णिमा, पंकज और कृति ने आत्मविश्वास के साथ सभी सवालों के सही जवाब दिए, जिस पर कलेक्टर ने उनकी सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

🟠पौष्टिक आहार की गुणवत्ता पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पूरक पोषण आहार, विशेष रूप से रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए,कि शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।🟠खेल-खेल में सीखेंगे नौनिहाल

कलेक्टर ने आंगनबाड़ी सहायिका को निर्देशित किया, कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर खेल-खेल,चित्रों,वास्तविक फलों-सब्जियों और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से पढ़ाया जाए। उन्होंने कहा,कि केंद्र का हर बच्चा सामान्य जानकारियां आत्मविश्वास के साथ बता सके,इसके लिए प्रतिदिन रोचक और सहभागितापूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएं।

🟠व्यवस्थाओं में कमी पर जताई नाराजगी

निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए,संबंधित कर्मचारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा,कि बच्चों के पोषण, शिक्षा और देखभाल से जुड़े दायित्वों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।🟠”आंगनबाड़ी बच्चों के भविष्य की पहली पाठशाला”

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा,कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं,बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। इसलिए यहां शिक्षा, पोषण और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हों, ताकि प्रत्येक बच्चे को बेहतर प्रारंभिक विकास का अवसर मिल सके।

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