संदिली सिंह,रायपुर/छत्तीसगढ़,20सितंबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
राज्य जीएसटी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए,170 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए चल रहे करोड़ों रुपये के जीएसटी घोटाले का भंडाफोड़ किया हैं। इस मामले का मास्टरमाइंड मो. फरहान सोरठिया हैं, जो लंबे समय से जीएसटी कर सलाहकार के रूप में काम कर रहा था।
🟠एक महीने की जांच में खुला घोटाला
राज्य जीएसटी की बी.आई.यू. टीम पिछले एक महीने से इस सिंडिकेट पर नजर रखे हुए थी। 12 सितंबर को फरहान के ऑफिस पर छापेमारी में 172 बोगस फर्मों से जुड़े दस्तावेज मिले। जांच में सामने आया,कि फरहान ने 5 स्टाफ की मदद से फर्म पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग और ई-वे बिल बनाने का नेटवर्क खड़ा किया था।
🔸️फर्जी किरायानामा, सहमति पत्र और एफिडेविट जैसे दस्तावेज तैयार कर बोगस पंजीकरण किए जा रहे थे।
🔸️26 फर्मों से ही 100 करोड़ का नुकसान।
🔸️प्रारंभिक जांच में सामने आया,कि केवल 26 बोगस फर्मों से ही।
🔸️822 करोड़ रुपये का ई-वे बिल जनरेट हुआ।
🔸️जबकि रिटर्न में सिर्फ 106 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया गया।
🔸️इससे राज्य को 100 करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी का नुकसान हुआ हैं।
🟠नकद और सोने की बरामदगी
17 सितंबर को फरहान के चाचा मो. अब्दुल लतीफ सोरठिया के घर पर हुई तलाशी में:
🔸️1.64 करोड़ रुपये नकद
🔸️400 ग्राम सोना बरामद हुआ।
🔸️बरामद नकद और सोने की जानकारी आयकर विभाग को भेज दी गई हैं।
🟠कई राज्यों में फैला नेटवर्क
जांच में पता चला हैं,कि यह नेटवर्क केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था। इन बोगस फर्मों का पंजाब, असम, मणिपुर और ओडिशा तक फैलाव था।
🟠अनेक कंपनियां जांच के दायरे में
राज्य जीएसटी विभाग अब उन कंपनियों, ब्रोकरों और स्क्रैप डीलरों की जांच कर रहा हैं, जिन्होंने इन फर्जी फर्मों से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी हैं।












