पखांजूर(कांकेर)|रिपोर्टर : डेनियल सेप्ती,दिनांक:3 फरवरी 2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतर्गत आने वाले कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय में आज अभूतपूर्व जन-आक्रोश देखने को मिला। ब्लॉक मुख्यालय को उसका वास्तविक अधिकार और बुनियादी सुविधाएं दिलाने की मांग को लेकर 18 पंचायतों के हजारों ग्रामीण एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों के समर्थन में स्थानीय व्यापारियों के बंद के चलते पूरा क्षेत्र पूरी तरह ठप रहा और हालात चक्काजाम जैसे बन गए।
🟠68 गांवों में सन्नाटा, बाजार पूरी तरह बंद
इस जन आंदोलन का असर कोयलीबेड़ा क्षेत्र के 68 गांवों में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि कोयलीबेड़ा को भले ही ब्लॉक मुख्यालय का दर्जा प्राप्त हैं,लेकिन आज भी यहां मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव हैं।ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराते हुए व्यापारियों ने भी अपनी दुकानें स्वतःस्फूर्त बंद रखीं, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं।
🟠ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी उपेक्षा समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिन पर वे आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए—
🟠कार्यालयों का स्थानीय संचालन
ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद कई शासकीय कार्यालय अन्यत्र संचालित हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग हैं,कि सभी विभागीय कार्यालयों का संचालन कोयलीबेड़ा से ही किया जाए।
🟠उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज की स्थापना
क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता हैं। ग्रामीणों ने कोयलीबेड़ा में शीघ्र महाविद्यालय खोलने की मांग की हैं।
🟠बैंकिंग सुविधा का विस्तार
किसानों और छोटे व्यापारियों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा खोलने की मांग जोर-शोर से उठाई गई।
🟠प्रशासन सतर्क,भारी पुलिस बल तैनात
हजारों की भीड़ और बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया।एसडीएम पखांजूर टीकाराम देवांगन ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका ज्ञापन स्वीकार किया और उन्हें आश्वासन दिया।
🟠एसडीएम पखांजूर टीकाराम देवांगन का बयान:
“ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा हैं। उनकी बातों को गंभीरता से सुना गया हैं,और सभी मांगों को विधिवत उच्च अधिकारियों एवं शासन तक पहुंचाया जाएगा। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं।”
🟠चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा उग्र आंदोलन
फिलहाल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी हैं,कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज एवं उग्र किया जाएगा। कोयलीबेड़ा में उपजे इस जन-आक्रोश ने शासन-प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी हैं।












