संदिली सिंह,रायपुर,3अगस्त 2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में, विकास के साथ-साथ अब सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता की नई लहर देखने को मिल रही है। जल जीवन मिशन के तहत भोपालपटनम और उसूर विकासखंड के बामनपुर, गुंजेपरती और नंबी गांवों में हुई, पानी की जांच ने ग्रामीणों की सोच बदल दी।
हालांकि “हर घर नल से जल” योजना के अंतर्गत, इन गांवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध थी,फिर भी कुछ ग्रामीण परंपरागत आदतों या जानकारी के अभाव में, नदी और नालों के पानी का उपयोग पीने के लिए कर रहे थे। इससे ग्रामीण क्षेत्रो में, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की संभावना बनी हुई थी। जल-जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में प्रशासन ने तय किया, कि ग्रामीणों को जल की गुणवता और उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बारे में, व्यावहारिक तरीके से समझाने का अभियान चलाया जाएगा। स्थिति को देखते हुए, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला की टीम के साथ विशेष जनजागरूकता अभियान शुरू किया।
गांवों में पहुंचकर टीम ने सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और ग्रामीणों की उपस्थिति में, नल के पानी और नदी-नाले के पानी का परीक्षण किया। जांच में पाया गया, कि नदी-नाले के पानी में हानिकारक तत्व मौजूद हैं, जबकि नल का पानी सुरक्षित और स्वच्छ है। परिणाम देखकर ग्रामीणों ने, भविष्य में केवल नल के पानी का उपयोग करने का संकल्प लिया।
स्थानीय लोगों ने इस पहल को “आंखें खोलने वाला अनुभव” बताया। यह अभियान साबित करता हैं, कि सही जानकारी और वैज्ञानिक प्रमाण के साथ समझाने पर, लोग सकारात्मक बदलाव के लिए तैयार हो जाते हैं। अब ये तीनों गांव न केवल, जल उपलब्धता में आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जल की गुणवत्ता को लेकर भी सजग हैं।
📢जन अपील:
ग्रामीण और शहरी सभी नागरिकों से निवेदन हैं, कि पीने के लिए हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पानी का ही उपयोग करें। नलजल या फिल्टर किया हुआ, पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है,जबकि नदी-नाले का पानी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए, केवल सुरक्षित पेयजल का सेवन करें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।












