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मैनपाट में हाथियों का कहर, एक दर्जन से अधिक मकान तबाह, फसलें चौपट

संदिली सिंह,रायपुर,29अगस्त2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

सरगुजा जिले के मैनपाट वन परिक्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ हैं। पिछले एक महीने से 13 हाथियों का दल अलग-अलग गांवों और जंगलों में विचरण कर रहा हैं। इन हाथियों ने जहां ग्रामीणों की नींद हराम कर दी हैं, वहीं अब तक दर्जनों मकानों और खेतों में लगी फसलों को भी बर्बाद कर दिया हैं।

ग्रामीणों का कहना हैं,कि हाथियों का झुंड रात के समय गांवों की ओर रुख करता हैं,और घरों के साथ-साथ खेतों को भी नुकसान पहुंचाता हैं। मैनपाट वन परिक्षेत्र के कंडराजा, बारवाली और पेंट के जंगलों में 13 सदस्यीय यह दल लगातार सक्रिय हैं। हाथियों के हमले से अब तक एक दर्जन से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों की साल भर की मेहनत भी बर्बाद हो गई हैं, क्योंकि कई एकड़ में लगी धान की फसल को हाथियों ने रौंद डाला हैं।

🟠मैनपाट हाथियों का प्राकृतिक रास्ता

इस पूरे मामले पर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो का कहना हैं,कि मैनपाट हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर हैं। यही कारण हैं,कि हाथियों का यहां लगातार विचरण बना रहता हैं। विधायक के अनुसार, कच्चे मकान हाथियों के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले पक्के मकान अपेक्षाकृत सुरक्षित साबित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया,कि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना को तेजी से लागू किया जा रहा हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित आवास मिल सके और वन्यजीवों के हमलों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

🟠ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील

विधायक रामकुमार टोप्पो ने ग्रामीणों से अपील की हैं,कि वे हाथियों के करीब न जाएं। खासतौर पर झुंड से अलग हुआ हाथी सबसे ज्यादा आक्रामक और खतरनाक साबित होता हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग भी लगातार निगरानी में हैं और ग्रामीणों को समय-समय पर अलर्ट कर रहा हैं।

🟠दहशत में ग्रामीण

हाथियों के हमलों से मैनपाट क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। रात होते ही गांव के लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं। कई परिवारों ने तो अपने कच्चे मकानों को छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण ली हैं। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह हैं,कि यदि फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं तो आने वाले दिनों में उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

वन विभाग और प्रशासन की ओर से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही हैं,लेकिन फिलहाल ग्रामीणों को राहत मिलती नहीं दिख रही हैं।

 

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