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“जब हम मिट्टी में मिल रहे हों, तो ये मिट्टी भी रोए इस धरती की” : रुबिका लियाकत

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,25जनवरी2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन अभिनव नीरव मंडल में आयोजित प्रथम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार सुश्री रुबिका लियाकत शामिल हुईं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा के साथ उनका विचारोत्तेजक संवाद संपन्न हुआ, जिसमें राष्ट्रवाद, पत्रकारिता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

राष्ट्रवाद पर अपने विचार रखते हुए रुबिका लियाकत ने कहा, “जब हम मिट्टी में मिल रहे हों, तो यह मिट्टी भी रोए इस धरती की।” उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले 30 सेकंड के वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सलाह देते हुए कहा कि तथ्यों की स्वयं जांच करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।

उन्होंने अपने 18 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति या विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि सत्य, अच्छाई और भारत के पक्ष में काम करती हैं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा मूल रूप से सेक्युलर हैं और भारतीय संस्कृति आपसी सम्मान और समरसता पर आधारित हैं।

निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे स्वयं कलमा पढ़ती हैं और उनके बच्चे कुरान पढ़ते हैं, लेकिन वे उन्हें वंदे मातरम् और भारत माता की जय कहने का संस्कार भी दे रही हैं, क्योंकि उनकी पहली पहचान भारतीय होने से हैं।

प्रश्नोत्तर सत्र में पत्रकारिता की छात्रा के सवाल पर उन्होंने कहा कि परिश्रम, सत्यनिष्ठा और निर्भीकता ही एक सफल पत्रकार की पहचान हैं। कार्यक्रम के अंत में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिसमें पूजा अग्रवाल का काव्य संग्रह ‘अम्मा की चाय’ प्रमुख रूप से शामिल रहा।सत्र में बड़ी संख्या में युवा, साहित्यप्रेमी और पत्रकारिता से जुड़े लोग उपस्थित थे।

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