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पाँचवाँ भारत ग्रामीण संवाद: हरित विकास को गति देने की रणनीति पर मंथन

संदिली सिंह,रायपुर,5अगस्त 2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

छत्तीसगढ़ में हरित विकास को, जनभागीदारी से साकार करने के उद्देश्य से भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में, पाँचवाँ भारत ग्रामीण संवाद 2025 सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। “गाँवों के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की हरित आर्थिक बदलाव की यात्रा” विषय पर आयोजित इस संवाद में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और हरित रोजगार सृजन पर व्यापक चर्चा हुई।वर्चुअल माध्यम से, जुड़े उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में हरित विकास की मजबूत नींव रखी जा चुकी हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी अहम कदम हैं।

उन्होंने कहा,कि यदि गाँवों को केंद्र में रखकर परंपरागत ज्ञान और संसाधनों का सतत उपयोग किया जाए, तो जैविक खेती, सौर ऊर्जा और स्थानीय स्तर पर रोजगार, सृजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ को एक हरित राज्य के रूप में विकसित किया जा सकता हैं।

इस अवसर पर वन विभाग और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया संस्था के बीच, हरित बदलाव के लिए सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। 🟠IIM रायपुर ने प्रदेश के हरित विकास के पाँच प्रमुख स्तंभ प्रस्तुत किए:

🔸️परंपरागत खेती और वन संसाधनों का संरक्षण — जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा।

🔸️हरित रोजगार एवं पर्यावरणीय पर्यटन — स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर।

🔸️स्थानीय उत्पादन एवं विपणन को प्रोत्साहन — ग्रामीण उद्योग और हस्तशिल्प को बाज़ार से जोड़ना।

🔸️ सौर ऊर्जा आधारित ग्राम-विद्युत प्रबंधन में                जनभागीदारी—नवीकरणीय ऊर्जा से ऊर्जाआत्मनिर्भरता।

🔸️नीति एवं संस्थागत ढाँचे का सुदृढ़ीकरण — योजना और क्रियान्वयन में पारदर्शिता और स्थायित्व।

🟠विशेषज्ञों की राय:

🔸️अपर मुख्य सचिव (वन एवं जलवायु परिवर्तन)ऋचा शर्मा — “छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सम्पदा और जनभागीदारी मिलकर हरित विकास का आदर्श मॉडल बना सकती हैं।”

🔸️प्रमुख सचिव (पंचायत एवं ग्रामीण विकास)निहारिका बारिक सिंह — “ग्राम पंचायतें इस बदलाव की धुरी बनेंगी और महिलाओं को नेतृत्व दिया जाएगा।”

🔸️सचिव (पंचायत विभाग)भीम सिंह — “अब पंचायतों का मूल्यांकन जल संरक्षण, स्वच्छता और हरित मानकों के आधार पर किया जाएगा।”

🔸️सचिव (सुशासन अभिसरण विभाग) राहुल भगत — “हरित अर्थव्यवस्था को केवल शासन की योजना न मानकर समुदाय को इसका मुख्य भागीदार बनाना होगा।”

🟠प्रमुख मुद्दों पर चर्चा :

🔸️जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन

🔸️शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

🔸️पारंपरिक बीजों की उपलब्धता

🔸️वनों की कटाई पर रोक

🔸️कचरा प्रबंधन में जनभागीदारी

🔸️रासायनिक खेती पर निर्भरता घटाना

🔸️परंपरागत उद्योगों व हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करना

🟠हरित बदलाव के संभावित लाभ:

विशेषज्ञों का मानना हैं, कि इस पहल से न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी मदद मिलेगी। गाँवों में आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था, बेहतर कृषि उत्पादन और सतत उद्योगों का विकास, राज्य की आर्थिक और पर्यावरणीय सेहत को मजबूत करेगा।

 

 

 

 

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